अध्याय 2

खाद्य तथा रसद विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के अन्तर्गत अनुभागों के मध्य कार्य-बँटवारे का विवरण

खाद्य एवं रसद अनुभाग - 1

1-    खाद्य तथा रसद संगठन के आपूर्ति/हाट शाखा/लेखा शाखा के राजपत्रित अधिकारियों का अधिष्ठान सम्बन्धी कार्य।

2-    खाद्य तथा रसद सचिव शाखा का अधिष्ठान सम्बन्धी कार्य।

3-    सतर्कता, सी0बी0सी0आई0डी0, ई0ओ0डब्ल्यू0, एन्टी करप्सन तथा खाद्य प्रकोष्ठ आदि की जाँचों का विष्लेषण एवं समन्वय कार्य।

4-    खाद्य प्रकोष्ठ से सम्बन्धित समस्त कार्य।

5-    लेखा प्रकोष्ठ में होने वाले समस्त कार्य (लेखाकार-सह-कोषाध्यक्ष के माध्यम से)

6-    विधायकों एवं सांसदों से प्राप्त पत्रों के निस्तारण सम्बन्धी समन्वय कार्य।

7-    लोक शिकायतों का विष्लेषण/समन्वय कार्य।

8-    मा0 मुख्यमंत्री जी की मण्डलीय समीक्षा बैठकों से सम्बन्धित कार्य।

9-    वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक।

 

खाद्य एवं रसद अनुभाग - 2

1-    खाद्य तथा रसद संगठन के आपूर्ति/हाट/लेखा शाखा के अराजपत्रित अधिकारियों/कर्मचारियों का अधिष्ठान सम्बन्धी कार्य।

2-    खाद्यायुक्त कार्यालय के अराजपत्रित कर्मचारियों से सम्बन्धित कार्य।

3-    अधिष्ठान सम्बन्धी विविध मामले एवं अधिष्ठान सम्बन्धी मामलों का समन्वय कार्य।

4-    उत्तरांचल समन्वय सम्बन्धी कार्य।

 

खाद्य एवं रसद अनुभाग - 3

1-    खाद्य तथा रसद संगठन के समस्त विभागों का बजट सम्बन्धी कार्य।

2-    लोक लेखा समिति (पी0ए0सी0) की बैठक से सम्बन्धित कार्य।

3-    पी0ए0सी0 प्रस्तर तथा सम्परीक्षा रिपोर्ट एवं सम्परीक्षा आपत्तियों से सम्बन्धित कार्य।

4-    खाद्य एवं रसद संगठन के समस्त विभागों के कार्यालय भवन/गोदाम आदि का किराया स्वीकृत करना एवं उससे सम्बन्धित समस्त कार्य। (गोदाम निर्माण/मरम्मत सहित)

5-    भूमि अध्यास्ति से सम्बन्धित कार्य।

6-    महामहिम राज्यपाल के अभिभाषण तथा मा0 मुख्यमंत्री जी एवं मा0 खाद्य मंत्री जी के बजट भाषण से सम्बन्धित समस्त कार्य।

7-    कैश क्रेडिट लिमिट से सम्बन्धित समस्त कार्य।

8-    व्यय बजट आयोग/वित्त आयोग से सम्बन्धित कार्य।

9-    बजाज कमेटी की संस्तुतियों से सम्बन्धित कार्य।

10-  निष्प्रयोज्य वस्तुओं का वार्षिक सत्यापन।

11-    प्रमुख सचिव शाखा एवं उसके अधीनस्थ कार्यालयों को मोटर गाड़ी, टाइपराईटर, डुप्लीकेटर, बाइसिकल, फर्नीचर, टेलीफोन, फोटोपेपर, कम्प्यूटर तथा अन्य आवश्यक कार्यालयी सामग्रियों की      स्वीकृति, क्रय व्यवस्था तथा भुगतान सम्बन्धी कार्य।

12-    विश्व खाद्य दिवस के आयोजन से सम्बन्धित समस्त कार्य।

13-    मा0 मु0 ख्यमंत्रीजी एवं मा0 खाद्य मंत्री जी की प्रेस कान्फ्रेन्स तथा श्री राज्यपाल के संदेश के प्रसारण हेतु सामग्री का संकलन तथा अन्य रिपोर्ट।

14-    महामहिम राष्ट्रपति जी को भेजी जाने वाली आख्याएं।

 

खाद्य एवं रसद अनुभाग - 4

1-    मूल्य समर्थन योजना के अन्तर्गत धान और खरीफ के मोटे अनाजों के खरीद की नीति निर्धारण तथा खरीद सम्बन्धी कार्य।

2-    लेवी चावल के उद्ग्रहण हेतु खरीद नीति का निर्धारण तथा तत्सम्बन्धी समस्त कार्य।

3-    उ0प्र0 धान एवं चावल (उद्ग्रहण और व्यापार विनियमन आदेश) 1985 से सम्बन्धित कार्य।

4-    खरीफ फसलों के सम्बन्ध में कृषि लागत और मूल्य आयोग सम्बन्धी कार्य।

5-    परिवहन/भण्डारण/अधोमानक क्रय के फलस्वरूप धान/चावल तथा क्षतिग्रस्त धान/चावल के निस्तारण सम्बन्धी कार्य।

6-    लेवी चावल/कस्टम मिल चावल का राज्यपूल/केन्द्रीय पूल में भण्डारण सम्बन्धी कार्य।

7-    धान/चावल खरीद के परिवहन हैण्डलिंग से सम्बन्धित कार्य।

8-    उ0प्र0 राज्य भण्डारागार निगम/केन्द्रीय भण्डारागार निगम  से सम्बन्धित  समन्वय व अन्य कार्य।

 

खाद्य एवं रसद अनुभाग - 5

1-    गेहूँ तथा रबी खाद्यान्नों के उद्ग्रहण का नीति निर्धारण तथा सम्बन्धी समस्त कार्य।

2-    बोरों की खरीदारी, बिक्री का भाव निर्धारण करना तथा स्टोरेज सम्बन्धी सामग्रियों तिरपाल, फयूमिगेषन, टेन्टस बीमा बैलेंस, इम्सेक्टीसाइड, ताला इत्यादि की खरीद और रख-रखाव। प्रक्योर किये गये गेहूँ का निस्तारण केवल जहाँ तक उसका सम्बन्ध केन्द्रीय पूल में देने से है।

3-    व्हीट रोलर फ्लोर मिल्स से सम्बन्धित कार्य।

4-    परिवहन/भण्डारण/अधोमानक क्रय के फलस्वरूप गेहूँ/क्षतिग्रस्त गेहूँ से सम्बन्धित प्रकरणों के निस्तारण सम्बन्धी कार्य।

5-    गेहूँ क्रय के परिवहन/हैण्डलिंग से सम्बन्धित कार्य।

 

खाद्य एवं रसद अनुभाग - 6

1-    पी0डी0एस0 के समस्त खाद्यान्नों की प्राप्ति तथा आवंटन/वितरण से सम्बन्धित समस्त कार्य।

2-    शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान खोलने, उनका निरीक्षण करने आदि से सम्बन्धित समस्त कार्य।

3-    भारत सरकार को खाद्यान्न वितरण से सम्बन्धित रिपोर्ट जन वितरण प्रणाली के अंतर्गत खाद्यान्न के अनुदान, दावा (सब्सिडी क्लेम) से सम्बन्धित कार्य।

4-    उ0प्र0 सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण आदेश) 2004 से सम्बन्धित कार्य।

5-    खाद्य सलाहकार एवं परामर्शदात्री समिति/सतर्कता समिति से सम्बन्धित कार्य।

6-    दैवी आपदाओं से सम्बन्धित समस्त कार्य।

7-    सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत खाद्यान्नों हेतु परिवहन/हैण्डिलिंग सें सम्बन्धित समस्त कार्य।

8-    कल्याणकारी संस्थाओं को खाद्यान्न का आवंटन।

9-    भारतीय खाद्य निगम के समन्वय सम्बन्धी कार्य।

 

खाद्य एवं रसद अनुभाग - 7

1-    आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 से सम्बन्धित समस्त कार्य।

2-    पेट्रोलियम पदार्थों (यथा मिट्टी का तेल/पेट्रोल/डीजल/एल0पी0जी0 आदि) के आवंटन/वितरण तथा प्रबन्धन  एवं तत्सम्बन्धी नियंत्रणादेशों/लिटीगेशन सम्बन्धी समस्त कार्य।

3-    चीनी के आवंटन/वितरण तथा प्रवर्तन एवं लिटीगेशन से सम्बन्धित समस्त कार्य।

4-    चोर बाजारी निवारण तथा आवश्यक वस्तु वस्तु प्रदाय अधिनियम 1980 से सम्बन्धित समस्त कार्य।

5-    समस्त आवश्यक वस्तुओं (खाद्यान्नों को सम्मिलित करते हुए) की मूल्य प्रवृत्ति से सम्बन्धित कार्य।

6-    उ0प्र0 आवश्यक वस्तु (मूल्य प्रदर्शन और सम्भरण तथा वितरण पर नियंत्रण) आदेश 1975

7-    उ0प्र0 अनुसूचित वस्तु व्यापारी (लाइसेंस देना और उप संचर पर निबन्धन) आदेश 1979 (कम्पोजिट लाइसेंस) के संशोधन आदि से सम्बन्धित कार्य।

8-    राजस्व एवं विशिष्ट अभिसूचना निदेशालय से सम्बन्धित कार्य।

9-    आवश्यक वस्तु अधिनियम से सम्बन्धित समस्त कार्य।

 

खाद्य एवं रसद अनुभाग - 8

1-    उ0प्र0 राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम से सम्बन्धित समस्त कार्य।

2-    सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अन्तर्गत समन्वय से सम्बन्धित समस्त कार्य।

3-    उ0प्र0 शहरी भवन/किराये पर देने, किराये तथा बेदखली का विनियमन अधिनियम, 1972

4-    संचरण निदेशालय से सम्बन्धित समस्त कार्य।

 

डेस्क इकाई

1-    खाद्य तथा रसद स्थाई समिति से सम्बन्धित कार्य।

2-    विधान सभा/परिषद के प्रश्नों एवं आश्वासनों का समन्वय कार्य।

3-    विधान मण्डल की वित्तीय एवं प्रशासकीय विलम्ब समिति, प्राक्कलन समिति, प्रश्न एवं सन्दर्भ समिति, प्रतिनिधायन समिति, सामाजिक सदभाव समिति, सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति एवं विधान परिषद की अध्ययन एवं भ्रमण समिति आदि से सम्बन्धित समन्वय कार्य।

4-    मा0 मंत्रिपरिषद/मा0 मंत्री परिषद की उप समिति के निर्णयों का कार्यान्वयन जहाँ उनका सम्बन्ध विभाग के कई अनुभागों से सम्बन्धित हो।

5-    जन वितरण प्रणाली की मार्गगत तथा संग्रह हानि एवं अपलेखन सम्बन्धी कार्य।

6-    जन वितरण प्रणाली की चीनी तथा अन्य किसी खाद्यान्न से सम्बन्धित सभी प्रकार की हानियों के सभी प्रकरण जिसका निस्तारण नीलामी से होना है।

        (जन वितरण प्रणाली में हानि का तात्पर्य राज्यपूल/सेन्ट्रल पूल/पी0सी0एफ0 के गोदामों से विकास खण्ड के गोदाम में खाद्यान्न निर्गत होने के बाद मार्गगत एवं संग्रह हानि या गबन से है।)

 

उपभोक्ता संरक्षण एवं बाट माप विभाग

उपभोक्ता संरक्षण एवं बाट माप अनुभाग - 1

1-    विधिक माप विज्ञान विभाग से सम्बन्धित राजपत्रित/अराजपत्रित के अधिष्ठान से सम्बन्धित समस्त कार्य।

2-    विधिक माप विज्ञान विभाग के नियमावली/अधिनियम/लिटिगेशन/प्रवर्तन से सम्बन्धित समस्त कार्य।

3-    उक्त से सम्बन्धित विधान सभा/विधान परिषद/लोक सभा/राज्य सभा के प्रश्नों/नियमों/आश्वासनों से सम्बन्धित कार्य।

4-    मा0 मुख्यमंत्रीजी एवं मा0 खाद्य मंत्री जी की प्रेस कान्फ्रेंस तथा श्री राज्यपाल के संदेश के प्रसारण हेतु सामग्री का संकलन तथा अन्य रिपोर्ट।

5-    विधायकों एवं सांसदों से प्राप्त पत्रों के निस्तारण सम्बन्धी समन्वय कार्य।

6-    लोक शिकायतो का विश्लेषण/समन्वय कार्य।

7-    मा0 मुख्यमंत्रीजी की मण्डलीय समीक्षा बैठकों से सम्बन्धित कार्य।

8-    उपभोक्ता संरक्षण आयोग नियंत्रक, विधिक माप विज्ञान, उ0प्र0 कर्मचारी कल्याण निगम तथा सचिवालय/सत्कार सेवा संस्था से सम्बन्धित बजट सम्बन्धी समस्त कार्य।

9-    लोक लेखा समिति (पी0ए0सी0) की बैठक, पी0ए0सी0 प्रस्तर तथा सम्परीक्षा रिपोर्ट एवं सम्परीक्षा आपत्तियों से सम्बन्धित कार्य।

10-    उपभोक्ता संरक्षण एवं विधिक माप विज्ञान संगठन के समस्त विभागों के कार्यालय भवन/गोदाम आदि का किराया स्वीकृत करना एवं उससे सम्बन्धित समस्त कार्य।(गोदाम निर्माण/मरम्मत सहित)

11-    भूमि अध्याप्ति एवं कैश क्रेडिट लिमिट से सम्बन्धित कार्य।

12-    महामहिम राज्यपाल के अभिभाषण तथा मा0 मुख्यमंत्री जी एवं मा0 मंत्री जी के बजट भाषण से सम्बन्धित समस्त कार्य।

13-    व्यय बजट आयोग/वित्त आयोग एवं बजाज कमेटी की संस्तुतियों से सम्बन्धित कार्य।

14-    उपभोक्ता संरक्षण एवं विधिक माप विज्ञान शाखा एवं उसके अधीनस्थ कार्यालयों को मोटर गाड़ी, टाइपराईटर, डुप्लीकेटर, बाइसिकल, फर्नीचर, टेलीफोन, फोटोपेपर, कम्प्यूटर तथा अन्य आवश्यक कार्यालयी सामग्रियों की स्वीकृति, क्रय व्यवस्था तथा भुगतान सम्बन्धी कार्य।

 

उपभोक्ता संरक्षण एवं बाट माप अनुभाग - 2

1-    उपभोक्ता संरक्षण एवं राज्य आयोग व जिला फोरम से सम्बन्धित राजपत्रित अधिकारियों का अधिष्ठान सम्बन्धी कार्य।

2-    उपभोक्ता संरक्षण एवं राज्य आयोग व जिला फोरम से सम्बन्धित अराजपत्रित अधिकारियों का अधिष्ठान सम्बन्धी कार्य।

3-    उक्त से सम्बन्धित विधान सभा/विधान परिषद के प्रश्नों/नियमों/आश्वासनों से सम्बन्धित कार्य।

4-    उक्त से सम्बन्धित लोक सभा/राज्य सभा से सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर।

5-    20 सूत्रीय कार्यक्रम।

6-    समन्वय से सम्बन्धित समस्त कार्य।

7-    उत्तरांचल समन्वय सम्बन्धी कार्य।

8-    वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक।

9-    निष्प्रयोज्य वस्तुओं का वार्षिक सत्यापन।

 

डेस्क इकाई :-

1-    उ0प्र0 कर्मचारी कल्याण निगम तथा सचिवालय सत्याकर सेवा संस्था से सम्बन्धित राजपत्रित अधिकारियों के अधिष्ठान सम्बन्धी समस्त कार्य।

2-    उ0प्र0 कर्मचारी कल्याण निगम तथा सचिवालय सत्कार सेवा संस्था से सम्बन्धित अराजपत्रित अधिकारियों के अधिष्ठान सम्बन्धी समस्त कार्य।

3-    उक्त से सम्बन्धित विधान सभा/विधान परिषद के प्रश्नों/नियमों/आश्वासनों से सम्बन्धित कार्य।

4-    उक्त से सम्बन्धित लोक सभा/राज्य सभा से सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर।

5-    विधान मण्डल की वित्तीय एवं प्रशासकीय विलम्ब समिति, प्रावकलन समिति, प्रश्न एवं सन्दर्भ समिति, प्रतिनिधायन समिति, सामाजिक सदभाव समिति, सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति एवं विधान परिषद की अध्ययन एवं भ्रमण समिति आदि से सम्बन्धित समन्वय कार्य।

6-    मा0 मंत्रिपरिषद/मा0 मंत्री परिषद की उप समिति के निर्णयों का कार्यान्वयन जहाँ उनका सम्बन्ध विभाग के कई अनुभागों से सम्बन्धित हो।

7-    विधान सभा/परिषद के प्रश्नों एवं आश्वासनों का समन्वय कार्य।

8-    शाखा अधिष्ठान सम्बन्धी समस्त कार्य।

 

कर्तव्य एवं दायित्व
 

विभागीय कार्यकलापों के सुचारू संचालन तथा अधिकारियों/कर्मचारियों में उत्तरदायित्व बोध के उद्देश्य से मुख्यालय में विभागाध्यक्ष से लेकर केन्द्र स्तर तक तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पदवार कर्तव्य एवं दायित्व का विवरण क्रमशः निम्नवत्‌ है-

 

1. खाद्य आयुक्त-
 

      प्रदेश स्तर पर खाद्य तथा रसद विभाग के विभागाध्यक्ष की हैसियत से अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सेवा सम्बन्धी मामलों का निस्तारण/शासन की खाद्य नीति के सम्बन्ध में आवश्यक परामर्श एवं प्रस्ताव प्रस्तुत करना तथा तत्सम्बन्धी शासकीय नीतियों का प्रदेश में क्रियान्वयन, पर्यवेक्षण एवं अनुश्रवण कराना। लक्षित सार्वजनिक वितरण-प्रणाली के लिए खाद्यान्न का क्रय संग्रह एवं वितरण सुनिश्चित कराना। शासन की नीतियों दिशा-निर्देशों का अनुपालन कराना।

 

2. अपर खाद्य आयुक्त-
 

      मुख्य विपणन अधिकारी द्वारा विपणन शाखा से सम्बन्धित प्रस्तुत सभी प्रकरणों की समीक्षा कर खाद्य आयुक्त को प्रस्तुत करना।  विपणन शाखा के अधीनस्थ अधिकारियों/कर्मचारियों का पर्यवेक्षणीय दायित्व एवं अधिष्ठान सम्बन्धी प्रकरणों का निस्तारण कराना तथा यथा आवश्यकता खाद्य आयुक्त के निर्देशन में अन्य दायित्वों का निर्वहन।

 

3. मुख्य विपणन अधिकारी-
 

      खाद्य तथा रसद विभाग की विपणन शाखा से सम्बन्धित समस्त खाद्यान्न क्रय योजनाओं, जन वितरण योजनाओं का क्रियान्वयन, खाद्यान्न/खाली बोरों एवं मृत स्कन्ध के क्रय के सम्बन्ध में शासन एवं खाद्य आयुक्त को तकनीकी परामर्श देना, केन्द्रीय विश्लेषणशाला के प्रभारी अधिकारी, खाद्य नियंत्रण कक्ष का संचालन, बोरों की जूट मिलों से खरीद एवं प्रदेश के केन्द्रों तक संचरण, खाद्यान्न संचरण एवं विपणन शाखा के अधिकारियों/कर्मचारियों के अधिष्ठान सम्बन्धी प्रकरणों का निस्तारण आदि।

 

4. सम्भागीय खाद्य नियंत्रक-

   

1.

जिला जिला खाद्य विपणन अधिकारी, सम्भागीय खाद्य विपणन अधिकारी तथा अन्य अधिकारियों/ कर्मचारियों के निर्धारित दायित्वों का अनुपालन सुनिश्चित करना तथा यथा आवश्यक विभिन्न योजनाओं के अनुरूप दायित्व निर्धारित करते हुए अनुपालन कराना तथा उनका मार्गदर्शन करना।

2.

खाद्यान्न क्रय तथा संग्रह वितरण केन्द्रों की स्थापना तथा उनके लिए आवश्यक स्टाफ, स्टेशनरी, खाली बोरों, काँटा-बाँट, क्रेट, त्रिपाल, धन एवं अन्य साज सामान की व्यवस्था सुनिश्चित करना।

3.

क्रय केन्द्रों के लिये भूमि एवं संग्रह केन्द्रों के लिए गोदाम किराये की स्वीकृति।

4.

प्रत्येक केन्द्र के लिए हैंडलिंग एवं परिवहन ठेकेदार की नियुक्ति तथा दरों की  स्वीकृति।

5.

आवश्यकतानुसार मूवमेन्ट प्लान निर्गत करना एवं तदनुसार संचरण का अनुश्रवण करना, रेल भाड़ा भुगतान एवं प्राप्ति बिन्दु पर रैक की अनलोडिंग एवं संग्रह स्थल तक सम्यक्‌   परिवहन सुनिश्चित करना और आवश्यकतानुसार रेलवे क्लेम करना

6.

खाद्यान्न के प्रचलित बाजार भावों की समीक्षा करना तथा डिस्ट्रेस सेल रोकने के लिए क्रय केन्द्रों को क्रियाशील करने सहित अन्य समस्त यथेष्ट उपाय करना।   

7. सम्भाग के अन्दर समस्त जिलाधिकारियों/जिला खरीदअधिकारियों तथा समस्त क्रय संस्थाओं एवं संग्रह संस्थाओं के सम्बन्धित अधिकारियों से समन्वय एवं यथा आवश्यक कठिनाईयों का निराकरण।
8. शासनादेशों एवं खाद्य आयुक्त के आदेशों/निर्देशों का अधीनस्थ स्टाफ को प्रसारण तथा उनका अनुपालन सुनिश्चित करना।
9. क्रय केन्द्रों एवं संग्रह केन्द्रों/गोदामों का समय-समय पर निरीक्षण, गोदामों मं संग्रहीत खाद्यान्न की मात्रा गुणवत्ता पर निगरानी, रैण्डम आधार पर चेक सैम्पुल निकाल कर केन्द्रीय विश्लेषण शाला को परीक्षण हेतु प्रेषित करना।
10. खाद्य आयुक्त/शासन को आवश्यक सूचनाएं एवं आंकड़े समय-समय पर उपलब्ध कराना।
11. सम्भाग में घटित मार्गगत हानियों/संग्रह हानियों/अन्य हानियों के अपलेखन अथवा उत्तरदायित्व निर्धारण हेतु आवश्यक आदेश पारित करना।
12. सम्भाग में विभागीय कार्यकलापों पर प्रशासनिक नियंत्रण एवं समय-समय पर आवश्यकतानुसार विशेष व्यवस्था सम्बन्धी दिशा-निर्देश प्रसारित करना।
13. लाइसेंसिंग तथा विभिन्न नियंत्रण आज्ञाओं का संभाग के अन्दर समुचित परिपालन एवं प्रवर्तन सुनिश्चित करना।
14. अधीनस्थ अधिकारियों/कर्मचारियों के सेवा सम्बन्धी समस्त प्रकरणों का नियमानुसार समय से निस्तारण।

 

5 सम्भागीय खाद्य विपणन अधिकारी

 

1 सम्भाग के समस्त जनपदों में खाद्यान्न क्रय केन्द्रों की स्थापना, संग्रह हेतु नये गोदामों की व्यवस्था तथा उनके लिए पर्याप्त स्टाफ, स्टेशनरी, खाली बोरा, क्रेट, त्रिपाल, कांटा, बॉंट, कीटाणुनाशक, दवाओं आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करना।
2 समस्त जनपदों में परिवहन दरों के निर्धारण कार्य का अनुश्रवण तथा क्रय केन्द्रों/संग्रह केन्द्रों के लिए हैण्डलिंग व परिवहन ठेकेदारों की नियुक्ति कराना।
3

क्रय केन्द्रों के लिए भूमि के किराए एवं संग्रह केन्द्रों के लिए गोदाम किराये की समीक्षा कर सं0खा0नि0 द्वारा स्वीकृत कराना।

4

खुले बाजार में खाद्यान के प्रचलित बाजार भाव की समीक्षा करना और निधारित समर्थन मूल्य से बाजार भाव न गिरने पाये, इस हेतु समय से जनपदों में क्रय केन्द्र संचालित कराना।

5 क्रय किए जा रहे तथा संग्रहीत खाद्यान्न के स्टाक की मात्रा एवं गुणवत्ता की समय-समय पर जाँच करना।
6 सम्भाग में खाद्यान्न क्रय हेतु खाली बोरों की आवश्यकता का आंकलन, समस्त जनपदों में विभाग एवं अन्य क्रय संस्थाओं की आवश्यकतानुसार उपलब्धि सुनिश्चित करना।
7

अधिष्ठान सम्बन्धी मामलों में सम्भागीय खाद्य नियंत्रक को समय से यथोचित प्रस्ताव देना।  खाद्यान्न क्रय, संग्रह एवं वितरण हेतु तैनात स्टाफ के कार्यकलापों पर कड़ी निगरानी रखना तथा अधीनस्थ कर्मचारियों एवं अधिकारियों द्वारा नियमानुसार कार्य सम्पादन सुनिश्चित करना।

8

सम्भागीय विश्लेषण शाला में प्राप्त खाद्यान्न के नमूनों का विश्लेषण कराना तथा स्वयं निकाले गए चेक सैंपुल्स अपनी विश्लेषण रिपोर्ट के साथ केन्द्रीय चेक लैब, खाद्य तथा रसद विभाग को प्रेषित करना।  सम्भाग स्तरीय विश्लेषण शाला का दायित्व।

9

खरीद, संग्रह एवं वितरण में खाद्यान्न की मात्रा तथा गुणवत्ता मेंटेन रखने हेतु अधीनस्थ स्टाफ का मार्गदर्शन करना तथा सम्भागीय खाद्य नियंत्रक को तकनीकी परामर्श देना।

10

मार्गगत हानियों/संग्रह हानियों तथा अन्य हानियों के अपलेखन अथवा उत्तरदायित्व निर्धारण हेतु सम्भागीय खाद्य नियंत्रक को तकनीकी परामर्श देना।

11 सम्भाग में खरीदे गये खाद्यान्न की संग्रह केन्द्रों/गोदामों में शत-प्रतिशत समयबद्ध    डिलीवरी तथा मूवमेंट प्लान/आवंटन के अनुसार प्रेषण/निर्गमन एवं अन्य सम्भागों से प्राप्त खाद्यान्न का विधिवत्‌ संग्रह सुनिश्चित कराना।
12 खाद्य आयुक्त एवं शासन से प्राप्त आदेशों/निर्देशों का समयानुकूल अनुपालन सुनिश्चित करना।
13

लाईंसेन्सिंग तथा विभिन्न नियंत्रण आज्ञाओं का स्वयं तथा अधीनस्थ स्टाफ द्वारा अनुपालन एवं प्रवर्तन सुनिश्चित करना।

 

6. जिला खाद्य विपणन अधिकारी-

 

1 जनपद में क्रय केन्द्रों की स्थापना, खाली बोरा, क्रेट्स, त्रिपाल, कांटा-बांट आदि की व्यवस्था सुनिश्चित करना।
2 क्रय केन्द्रों के लिये हैण्डलिंग एवं परिवहन व्यवस्था हेतु ठेकेदारों की नियुक्ति सुनिश्चित करना।
3 क्रय केन्दों के लिए स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित करना।
4 अधीनस्थ स्टाफ के वेतन एवं भत्तों आदि का समय से आहरण एवं वितरणकरना।
5 अधीनस्थ स्टाफ के लिये आकस्मिक अवकाश की स्वीकृति।
6

जनपद की आवश्यकता के अनुरूप संग्रह गोदामों की व्यवस्था करना एवं संग्रह केन्द्र के लिए आवश्यक स्टाफ एवं सामान की व्यवस्था कराना।

7 जिलाधिकारी से सम्पर्क कर जिला खरीद अधिकारी का नामांकन कराना, जनपद के लिए परिवहन दरें एवं क्रय केन्द्रों के लिए ली गयी भूमि के लिए किराये के मानक निर्धारित कराना।
8 अन्य क्रय संस्थाओं के जनपद स्तरीय अधिकारियों, अन्य विभागीय अधिकारियों तथा जिला पूर्ति अधिकारी एवं जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित रखते हुए, क्रय संग्रह एवं वितरण योजना का जनपद में संचालन करना।
9 सम्भागीय खाद्य नियंत्रक, खाद्य आयुक्त एवं शासन से प्राप्त आदेशों/निर्देशों का पालन स्वयं करना तथा अधीनस्थ स्टाफ से अनुपालन सुनिश्चित करना।
10 सं0खा0नि0, खाद्य आयुक्त तथा शासन द्वारा समय-समय पर वॉंछित सूचनाएँ एवं परिलेख प्रेषित करना।
11 समस्त क्रय केन्द्रों पर मण्डी समितियों द्वारा किसानों के लिए सुख-सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करना।
12 समस्त क्रय केन्द्रों पर खाद्यान्न खरीद हेतु मानक नमूनों का प्रदर्शन सुनिश्चित करना।
13 अधीनस्थ स्टाफ की खाद्यान्न खरीद एवं संग्रह तथा प्रेषण/निर्गमन के समय मात्रा एवं गुणवत्ता की जाँच हेतु मार्ग दर्शन देना एवं समय-समय पर स्वयं मात्रा एवं गुणवत्ता का सुपरचेक करना।
14 संग्रह गोदामों पर संग्रह के समय, भण्डारण अवधि में, एवं वितरण/निर्गमन के समय मात्रा एवं गुणवत्ता का सत्यापन करना।
15 संग्रह गोदामों में संग्रहीत खाद्यान्न की गुणवत्ता बनाए रखने हेतु अधीनस्थ स्टाफ द्वारा समुचित उपाय सुनिश्चित करना तथा प्रत्येक संग्रह गोदाम पर आवश्यकतानुसार सामान उपलब्ध कराना।
16 मूवमेंट प्लान के अनुसार जनपद के क्रय केन्द्रों से संग्रह गोदामों तक तथा संग्रह गोदामों से अन्य केन्द्रों को खाद्यान्न प्रेषण सुनिश्चित करना तथा आवंटन के अनुसार जनपद में वितरण कराना।
17 निर्धारित परिवहन दर के अनुसार ठेकेदारों का भुगतान हेतु एक स्थान से दूसरे स्थान की दूरी सत्यापित करना एवं गोदाम हेतु संग्रह क्षमता सत्यापित करना।
18 जनपद में क्रय केन्द्रों/संग्रह केन्द्रों पर घटित मार्गगत हानियों/संग्रह हानियों की सर्वे रिपोर्ट अपनी स्पष्ट आख्या के साथ सं०खा० नियंत्रक को अपलेखन अथवा उत्तरदायी कर्मचारी/ठेकेदार से वसूली हेतु संस्तुति सहित अग्रसारित करना।
19 यह सुनिश्चित करना कि उनके अधीनस्थ केन्द्रों तथा कार्यालयों में स्टाफ द्वारा निर्धारित दायित्व का निर्वहन किया जा रहा है कि नहीं, अनियमितता प्रकाश में आने पर यथोचित नियमानुसार कार्यवाही करते हुए सं0खा0नि0/खाद्य आयुक्त को आख्या प्रेषित करना।
20 लाइसेंसिंग तथा विभिन्न नियंत्रण आज्ञाओं का जनपद में स्वयं एवं अधीनस्थस्टाफ द्वारा अनुपालन एवं प्रवर्तन सुनिश्चित करना।
21 अधीनस्थ केन्द्रों/कार्यालयों का समय-समय पर निरीक्षण करना तथा संग्रहीत खाद्यान्न के चेक सैंपुल निकालकर यथानिर्देश सम्भागीय अथवा केन्द्रीय विश्लेषणशाला को अपनी आख्या सहित भेजना।
22 संग्रह केन्द्रों/गोदामों के लिए सम्बद्ध धर्मकाँटे निर्दिष्ट करना।
23 जनपद स्तरीय विश्लेषणशाला के प्रभारी का दायित्व।

 

7. वरिष्ठ विपणन निरीक्षक-

 

1 विपणन निरीक्षक की अनुपस्थिति में उसके द्वारा सम्पादित किए जाने वाले समस्त सामान्य कार्य सम्पादित करना।
2 क्रय केन्द्र प्रभारी अथवा संग्रह केन्द्र प्रभारी की स्थिति में अधीनस्थ विपणन निरीक्षकों एवं अन्य स्टाफ की ड्यूटी लगाना तथा उनके द्वारा सम्पादित कार्यों का पर्यवेक्षण करना एवं स्टाफ पर समुचित नियंत्रण रखना।
3 कैश बुक, स्टाक बुक तथा बैंक एकाउन्ट आदि व्यवस्थित रखना।
4 क्रय केन्द्रों पर कृषकों के लिए सुख-सुविधाओं की मण्डी समिति से व्यवस्था कराना, मण्डी समिति द्वारा न करने पर स्वयं व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए मण्डी शुल्क से उसकी प्रतिपूर्ति कराना।
5 क्रय केन्द्र की स्थापना, बैनर, साइन बोर्ड एवं समर्थन मूल्य योजना का प्रचार प्रसार करना तथा पर्याप्त क्रेट, त्रिपाल, मुद्रांकित बाट माप एवं खाली बोरों आदि की व्यवस्था करना।
6 क्रय केन्द्र पर खाद्यान्न के मानक नमूने प्रदर्शित करना।
7 क्रय केन्द्र हेतु निर्दिष्ट बैंक खाते का संचालन, कृषकों को खाद्यान्न के मूल्य का चेक द्वारा यथा आवश्यक भुगतान तथा लेखा अधिकारी को खाद्यान्न बिल भेज कर भुगतान की प्रतिपूर्ति अथवा अग्रिम धनराशि मंगाकर चालू खाते में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध रखना।
8 हैण्डलिंग एवं परिवहन ठेकेदार की व्यवस्था तथा उसके द्वारा सम्पादित कार्यों के भुगतान हेतु बिलिंग करना।
9

क्रय केन्द्र से संग्रह केन्द्र के डिलीवरी बिन्दु को क्रय किए गए खाद्यान्न का प्रेषण।

10 क्रय केन्द्र पर खरीद, संग्रह गोदाम  में प्राप्ति व भण्डारण, गोदाम से प्रेषण एवं निर्गमन प्रत्येक स्तर पर खाद्यान्न की मात्रा एवं गुणवत्ता की जॉंच तथा सुरक्षा के समुचित उपाय सुनिश्चित करना।
11 गोदाम किराये की समय से बिलिंग करना।
12 मूवमेन्ट प्लान/आवंटन अनुसार खाद्यान्न का प्रेषण/निर्गमन सुनिश्चित करना।
13 संग्रह गोदाम पर लाए गए खाद्यान्न के एक्‍नालेजमेंट निर्गत करना।
14 जि0खा0वि0 अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी, अन्य क्रय संस्थाओं तथा अन्य विभागीय अधिकारियों से समन्वय बनाये रखना।
15 संग्रह केन्द्रों पर घटित होने वाली मार्गगत हानियों, संग्रह हानियों तथा अन्य हानियों की सर्वे रिपोर्ट समय से बनाकर प्रेषित कराना।
16 निर्धारित प्रारूपों पर अभिलेखों को मेंटेन कराना।
17 समय-समय पर वांछित सूचनाएं एवं परिलेख प्रेषित करना।
18 विभाग द्वारा समय-समय पर निर्दिष्ट अन्यकार्य सम्पादित करना एवं अधीनस्थ स्टाफ द्वारा अनुपालन सुनिश्चित करना।
19 मार्केटइंटेलीजेंस मूल्य एवं आवक तथा अन्य आवश्यक सूचनाएँ एकत्र कराना।
20 लाइसेन्सिंग तथा अन्य नियंत्रण आज्ञाओं का परिपालन एवं प्रवर्तन सुनिश्चित कराना।
21 न्यायालय में लम्बित वादों की पैरवी सुनिश्चित करना।
22 विश्लेषण शाला में तैनाती अवधि में खाद्यान्न के प्राप्त नमूनों का विश्लेषण एवं नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करना।

 

8. विपणन निरीक्षक-

 

1 क्रय केन्द्रों पर विक्रय हेतु लाए गये तथा लेवी प्रणाली में खाद्यान्नों की गुणवत्ता व मात्रा की जॉंचोपरान्त खरीद, क्रय केन्द्र पर अस्थाई संग्रह की सुरक्षित व्यवस्था तथा निर्दिष्ट संग्रह केन्द्र को प्रेषण।
2 क्रय केन्द्र प्रभारी की स्थिति में कृषकों के लिए सुख-सुविधाओं की मण्डी समिति से व्यवस्था कराना, मण्डी समिति द्वारा न किए जाने पर स्वयं व्यवस्था करना एवं इस हेतु मण्डी शुल्क से कटौती करना।
3 क्रय केन्द्र पर पर्याप्त क्रेट, त्रिपाल, बांट माप विभाग से सत्यापित कांटा-बांट व खाली बोरों आदि की व्यवस्था करना।
4 क्रय केन्द्र की स्थापना बैनर/साइन बोर्ड लगाना व प्रचार-प्रसार कराना।
5 क्रय केन्द्र पर खाद्यान्न के मानकों के नमूने प्रदर्शित करना।
6 क्रय केन्द्र हेतु निर्दिष्ट बैंक के चालू खते का संचालन, विक्रेताओं को खाद्यान्न के मूल्य का यथा आवश्यक चेक द्वारा भुगतान, लेखा अधिकारी को समय से भुगतान के बिल भेजकर प्रतिपूर्ति अथवा अग्रिम धनराशि मंगाकर बैंक खाते में पर्याप्त धन की उपलब्धता सुनिश्चित रखना।
7 हैंडलिंग व परिवहन ठेकेदार की व्यवस्था करना उसके द्वारा सम्पादित किये गये कार्यों का भुगतान हेतु बिलिंग करना।
8 भा0खा0नि0 को सम्प्रदत्त खाद्यान्न की बिलिंग ।
9 संग्रह गोदाम पर तैनाती के समय गोदाम एवं उसमें संग्रहीत खाद्यान्न एवं राजकीय सम्पत्ति का समुचित रखाव।
10 संग्रह गोदाम पर लाए गए खाद्यान्न की मात्रा व गुणवत्ता की जॉंच करके यथोचित चट्टों में संग्रह कराना।
11 संग्रहीत खाद्यान्न की मात्रा एवं गुणवत्ता की नियमित जाँच करते हुए यथा आवश्यक कीटाणुनाशक दवाओं का प्रयोग कराना तथा सुरक्षा के अन्य उपाय करना।
12 मूवमेंट प्लान/आवंटन के अनुसार खाद्यान्न प्रेषण/निर्गमन।
13 रेल द्वारा खाद्यान्न प्राप्ति अथवा प्रेषण हेतु समय से यथेष्ट व्यवस्था।
14 वरिष्ठ विपणन निरीक्षक/केन्द्र प्रभारी द्वारा निर्दिष्ट अन्य कार्य।
15 कृत कार्यों से सम्बन्धित समस्त अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टियॉं करना तथा उनका समुचित रख-रखाव करना।
16 मार्केट इंटेलीजेंस, मूल्य एवं आवक तथा अन्य सूचनाएं एकत्र करना।
17 लाइसेंसिंग तथा नियंत्रण आज्ञाओं का परिपालन सुनिश्चित करना एवं प्रवर्तन कार्य।
18 न्यायालय में लम्बित वादों की समुचित पैरवी।
19 विश्लेषणशाला में तैनाती अवधि में खाद्यान्न के प्राप्त नमूनों का विश्लेषण एवं रजिस्टरों में प्रविष्टि।

 

9. लिपिक-

 

(अ)   केन्द्र पर रहने वाले लिपिकों के कर्तव्य-

 

1 केन्द्र प्रभारी के आदेशानुसार राजकीय कार्य करना उसका परम कर्तव्य होगा।
2 वह डाक प्राप्त करेगा तथा केन्द्र प्रभारी के सामने आवश्यक आदेश हेतु प्रस्तुत करेगा।
3 वह केन्द्र पर बनने वाले विवरण पत्रों (स्टेटमेंट) को बनाएगा एवं निर्धारित समय के अन्दर भेजता रहेगा।
4 प्रत्येक विषय की अलग-अलग पत्रावली (फाइल) रखेगा।
5 राजकीय आदेशों के लिए अलग-अलग गार्डफाइल रखेगा।  समय-समय पर सम्भागीय खाद्य नियंत्रक द्वारा भेजे जाने वाले आदेशों की भी अलग-अलग गार्ड फाइल बनाएगा।
6  डाक को सुचारू रूप से भेजना एवं राजकीय डाक टिकटों का समुचित हिसाब रखना उसका कर्तव्य होगा।
7 केन्द्र पर विभिन्न प्रकार के अभिलेखों/रजिस्टरों को व्यवस्थित करना तथा समस्त लिपिकीय कार्यों का सम्पादन।

 

(ब) जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी कार्यालय-

      जनपद स्तर पर स्थापित इस कार्यालय के अन्तर्गत होने वाले समस्त लिपिकीय कार्य जैसा कि कार्यालयाध्यक्ष द्वारा निर्देशित/आवंटित किया जाये।

(स) सम्भागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय-

      सम्भागीय मुख्यालय पर यथा आवंटित/निर्देशित समस्त लिपिकीय कार्य।

(द) खाद्य आयुक्त कार्यालय-

      मुख्यालय स्तर पर यथाआवंटित समस्त लिपिकीय कार्य।

10. विपणन सहायकों के कर्तव्य-

 

1 नियमित केन्द्रों/क्रय केन्द्रों/संग्रह बिन्दुओं पर तैनाती के समय वरिष्ठ विपणन निरीक्षक एवं विपणन निरीक्षक द्वारा सम्पादित किए जाने वाले कार्यों में प्रत्येक स्तर पर सहायक के रूप में सौंपा गया कार्य, यथा-खाली, भरे बोरों की गिनती, तौल तक पट्टी, नमूने लेना व विश्लेषण करना, कीटाणुनाशक दवा प्रयोग, प्रवर्तन एवं कार्यालय कार्य आदि सम्पन्न करना।
2 लिपिक के साथ अथवा उसकी अनुपस्थिति में लिपिकीय कार्य सम्पन्न करना।
3 जिला खाद्य विपणन अधिकारी से सम्बद्ध होने पर उनके कार्यालय कार्यों तथा विश्लेषणशाला में सहायक का कार्य सम्पादित करना।
4 सम्भागीय खाद्य नियंत्रक कार्यालय में स्थापित विश्लेषणशाला अथवा सचल दल में सहायक का कार्य करना।
5 प्रान्तीय मुख्यालय में स्थित केन्द्रीय विश्लेषणशाला में सहायक का कार्य।
6 आवश्यकतानुसार आवंटित अन्य कार्य।

 

11. केन्द्र पर चपरासियों के कर्तव्य-

 

1 राजकीय डाक वितरण का कार्य करेगा।
2 कार्यालय की सफाई और उसे समय पर खोलना व बन्द करना होगा।
3  कार्यालय के कर्मचारियों एवं आगन्तुकों को पानी पिलाना होगा।
4 डाक के भेजने के लिए लिफाफों को तैयार करेगा।
5 अन्य सभी कार्य जो कि चपरासियों द्वारा सामान्यतया किए जाते हैं, करेगा।

 

12. केन्द्र के प्रहरी (चौकीदार) के कर्तव्य-

 

1 गोदाम में होने वाले कार्य की समाप्ति पर वह देखेगा कि गोदाम के दरवाजे, खिड़कियॉं एवं ताले ठीक प्रकार से बंद हो गये हैं अथवा नहीं।
2 गोदाम के आस-पास अथवा अन्दर किसी भी प्रकार की असामान्य बात होने पर तुरन्त ही उसकी सूचना केन्द्र प्रभारी/गोदाम प्रभारी को देगा।
3 रात्रि में बल्लम व जलती लालटेन लेकर गोदाम के चारों ओर सतर्क होकर उसकी सुरक्षा करेगा।
4 यदि गोदाम पर उसके रहने के लिए स्थान है तो उसका गोदाम पर रहना अनिवार्य है।
5 गोदाम के अन्दर बाहर सफाई रखना।
6 निरीक्षण पुस्तिका अपने पास उसे रखना होगा और अधिकारी वर्ग के आने पर उनके समक्ष लिखने के लिए प्रस्तुत करेगा।
7 धूम्रीकरण कार्य में भी अपने प्रभारी निरीक्षक की सहायता करेगा।
8 समय-समय पर मिलने वाले अन्य सभी राजकीय आदेशों का पालन करेगा।

 

 आपूर्ति शाखा

 

 उपायुक्त(खाद्य) के कार्य/उत्तरदायित्व/

 जिला पूर्ति अधिकारी के कार्य/उत्तरदायित्व/
 

      जिला पूर्ति अधिकारी का पद खाद्य एवं रसद विभाग का आमुख पद है। खाद्य विभाग से सम्बन्धित समस्त कार्यों हेतु जिला पूर्ति अधिकारी जनपद में नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करता है। जन समस्याओं के निवारण के लिए जिला पूर्ति अधिकारी ही जनपद स्तर पर खाद्य विभाग का प्रतिनिधि है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाये रखने का समस्त उत्तरदायित्व जिला पूर्ति अधिकारी का है।

     प्रदेश के 1.0679 करोड़ गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों को उचित/निर्धारित मूल्य पर प्रतिमाह 3.73765 लाख मि०टन खाद्यान्न एवं 33 हजार मि0 टन चीनी उपलब्ध कराने तथा      प्रदेश के समस्त 4.176795 करोड़ कार्डधारकों को नियंत्रित मूल्य पर 1.32 लाख किलो लीटर मि0 तेल जिसका मूल्य रूपया 1.32 अरब है, उपलब्ध कराना जिला पूर्ति अधिकारी के नेतृत्व में  आपूर्ति विभाग का दायित्व है।

    पूर्ति निरीक्षक, वरिष्ठ पूर्ति निरीक्षक, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के समस्त कार्यों का अनुश्रवण किया जाता हैं।

    जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा राशन की दुकानों का नियुक्ति प्राधिकारी के रूप में अनुबन्ध किया जाता है तथा वो मि0 तेल थोक विक्रेताओं एवं डीजल आउटलेट, पेटी डीजल डीलर का        लाईसेन्सिग प्राधिकारी है। कुकिंग गैस, डीजल, पेट्रोल आदि आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराना तथा इनकी कालाबाजारी रोकने हेतु प्रभावी प्रवर्तन कार्य करना जिला पूर्ति अधिकारी का दायित्व है।

    क्षेत्रीय भ्रमण अथवा शिकायत प्राप्त होने पर उसकी जाँच कराई जाती है तथा अनियमितता पाये जाने पर विधिक/विभागीय कार्यवाही की जाती है।

    मूल्य समर्थन योजना के अन्तर्गत सहायक जिला खरीद अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाया जाता है।

    चुनाव में सेक्टर मजिस्ट्रेट/सहायक रिटर्निंग अफसर के रूप में कार्य किया जाता है। अधिकांश जनपदों में जिला पूर्ति अधिकारी प्रभावी यातायात के अत्यन्त महत्वपूर्ण दायित्व का निर्वहन करते हुए चुनाव से जुड़े हुए प्रत्येक कर्मी हेतु वाहन एवं ईधन की व्यवस्था सुनिश्चित करता है। उक्त के अतिरिक्त निर्वाचन खान-पान से सम्बन्धित दायित्व का निर्वहन भी जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा ही किया जाता है।

    बाढ़ एवं अन्य प्राकृतिक आपदा के समय जिला प्रशासन के साथ मिलकर पीड़ितों को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। कर्फ्यू के समय मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य करते हुए कर्फ्र्यूग्रस्त क्षेत्रों में दूध, सब्जी, मि0 तेल, आटा, चावल, दाल इत्यादि आवश्यक वस्तुओं का वितरण कराया जाता है।

    रेन्ट कन्ट्रोल के मुकदमों की सुनवाई करते हुए न्यायिक कार्यों का सम्पादन किया जाता है।

   पूर्ति निरीक्षक के कार्य एवं उत्तरदायित्वः-

   प्रत्येक जन्म लेने वाले शिशु का नाम राशन कार्ड मे दर्ज करना/परोक्ष रूप से नागरिकता सम्बन्धी प्रमाण पत्र जारी करने के साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत प्रदेश के

    समस्त परिवारो/राशन कार्डधारको तक मि0 तेल/गेहूँ/चावल की उपलब्धता नियंत्रित मूल्य पर सुनिश्चित कराते हुये प्रभावी नियंत्रण रखा जाता है।

     गरीबी रेखा के नीचे के लाभार्थियों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया जाता है।

    व्यक्ति के निवास (जनपद/राज्य मे) सम्बन्धी महत्वपूर्ण सूचनायें एकत्रित कर संकलित एवं सुरक्षित रखना।

    हमारे द्वारा निर्गत राशनकार्ड को ही आधार बनाते हुए राजस्व विभाग द्वारा सामान्य निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, परिवहन विभाग द्वारा ड्राईविंग लाईसेन्स, बैंकों द्वारा खाता

   खोलने में एवं पासपोर्ट बनवाने में साक्ष्य के रूप में प्रयोग किया जाता है।

    लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत बी0पी0एल0 एवं अन्त्योदय अन्न योजना के अन्तर्गत शहरी क्षेत्र से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचल तक खाद्यान्न/चीनी की निर्धारित       मूल्य एवं मात्रा मे उपलब्धता सुनिश्चित कराते हुये बाजार की शक्तियो पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाता है एवं आर्थिक अपराधियों एवं कालाबाजारी तथा जमाखोरी करने वाले तत्वों के       विरूद्ध नियमित रूप से एवं विशेष अभियान चलाकर प्रवर्तन करते हुए मुकदमा दर्ज कराया जाता है। विगत वित्तीय वर्ष में कुल 2080 प्रथम सूचना रिपोर्ट एवं रूपये 2.5835798        करोड़ की प्रतिभूति शासन के पक्ष में जब्त की गयी तथा कुल रूपये 15.3133410 करोड़ 6/नीलामी के माध्यम से राजकोष में जमा कराये गये थे।

  डीजल/रसोई गैस की उपलब्धता बनाये रखना तथा उपभोक्ताओं को नियमानुसार उपलब्ध कराना। साथ ही साथ कालाबाजारियों/अवैध संग्रहण/अवैध भण्डारण/अवैध रिफलिंग करने वालों के विरूद्व आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के अन्तर्गत विधिक कार्यवाही करना।

    बाढ़, सूखा, अग्निकांड एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओ के समय सर्वप्रथम पीड़ितो को तत्काल भोजन एव प्रकाश की व्यवस्था कराना। साम्प्रदायिक दंगों अथवा शान्ति व्यवस्था भंग       होने के अंदेशें या कर्फ्यू लगने पर नागरिकों को विषम परिस्थितियों में आवश्यक वस्तुयें उपलब्ध कराना।

    स्वास्थ विभाग द्वारा चलायी जा रही समस्त टीकाकरण योजनाओ (यथा पोलियो, चेचक) को उचित दर विक्रेताओं के सहयोग से सफल बनाना।

    भारत सरकार के सर्वोच्च प्राथमिकता के कार्यक्रमो मे से मध्यान्ह भोजन को सफल बनाने के लिये आवश्यक वस्तु यथा गेहूँ/चावल कुकिंग गैस का स्थाई सम्भरण एवं कोटेदारो के      माध्यम से सम्बन्धित विद्यालयो तक उपलब्धता सुनिश्चित कराना।

    मूल्य समर्थन योजना के अन्तर्गत किसानो से गेहूँ तथा धान की विभिन्न एजेन्सियों द्वारा क्रय किये जाने मे सहयोग करना तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वयं गोदाम पर डयूटी करते      हुये खरीद करना।

    लोक तन्त्र के आधार, निर्वाचन को सफल बनाने के लिये पोलिंग पार्टी, पुलिस, सेक्टर मजिस्ट्रेट/जोनल मजिस्ट्रेट/सहायक रिटर्निंग अधिकारी के दायित्वो तथा सम्पूर्ण निर्वाचन        व्यवस्था मे लगे कर्मियो/पर्यवेक्षको आदि के लिये वाहन/ईधन की व्यवस्था करना तथा चुनाव कर्मियो हेतु जलपान एवं भोजन का प्रबन्ध करना।

    समय-समय पर विभिन्न स्तरो से प्राप्त शिकायतो की जाँच करना।

    शहरी क्षेत्र मे पुराने भवनो के किरायेदारी मे आवंटन तथा आवंटित भवनो को मकान मालिको के रिलीज प्रार्थना पत्रो की जाँच करना।

    परफारमेंस का आधार लाभ कमाना होकर समाजकारी कल्याणकारी लक्ष्यों को प्राप्त करना तथा व्यक्ति का जीवन स्तर ऊँचा उठाना तथा अपराधों को कम करना है। जिसके अनुरूप     ही आपूर्ति निरीक्षकों द्वारा कार्य सम्पादित किया जाता है। जिसके अन्तर्गत राज्य के सर्वाधिक जरूरतमन्द व्यक्तियों (Poorest of the poor) से लेकर सर्वजन को सरकार की               जनकल्याणकारी मंशा के अनुरूप उनके जीवन को जीने लायक बनाने तथा जीवन स्तर को ऊपर उठाने के उद्देश्य से चलाई जा रही योजना यथा अन्त्योदय एवं बी0पी0एलका लाभ     लाभार्थियों तक पहुँचाने का कार्य किया जाता है।

    सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं में आर्थिक अपराध करने वाले यथा कालाबाजारियों एवं अवैध कारोबारियों के विरूद्ध कार्यवाही कर आर्थिक अपराध रोकने का       महत्वपूर्ण कार्य किया जाता है।  इस  प्रकार आर्थिक अपराध पर नियंत्रण द्वारा कानून व्यवस्था बनाये रखने में मदद की जाती है।

 
वित्त शाखा

वित्त एवं लेखा शाखा
 

खाद्य तथा रसद विभाग की लेखा शाखा में निम्नलिखित रूप से अधिकारी/कर्मचारी तैनात हैः-

क्र0सं0

पद का नाम

पदों की संख्या

वेतनमान

स्वीकृत

कार्यरत

1

वित्त नियंत्रक

1

1

16400-425-20000

2

उप मुख्य लेखाधिकारी

2

2

10000-325-15200

3

वित्त एवं लेखाधिकारी (मुख्यालय)

1

1

8000-275-13500

4

सहायक लेखाधिकारी (मुख्यालय)

3

1

7450-225-11500

5

संभागीय वरिष्ठ लेखाधिकारी

09

07

10000-325-15200

6

संभागीय लेखाधिकारी

08

06

8000-275-13500

7

सहा0 संभागीय लेखाधिकारी

10

05

7450-225-11500

8

ज्येष्ठ लेखा परीक्षक

67

23

5500-175-9000

9

लेखा परीक्षक

23

00

4500-125-7000

10

लेखाकार

222

110

5500-175-9000

11

सहायक लेखाकार

55

28

4500-125-7000

12

आशुलिपिक ग्रेड-प

1

1

5000-150-8000

13

आशुलिपिक ग्रेड-प

2

2

4000-100-6000

 

वित्त नियंत्रक/उप मुख्य लेखाधिकारी/लेखाधिकारी/सहा0 लेखाधिकारी
 

1-    बजट मदों का प्रारूपण, आयोजनागत/आयोजनेत्तर पक्ष के बजट सम्बन्धी तथा बजटीय नियंत्रण समस्त कार्य।

2-    व्यय नियंत्रण।

3-    क्रय आदि सम्बन्धी कार्यो का निष्पादन।

4-     क्रय तथा अन्य खर्चों से सम्बन्धित महत्वपूर्ण मामलों में विभाग/कार्यालय के प्रधान, जैसा भी प्रकरण हो, परामर्श प्रदान किया जाना।

5-    विभाग के प्रतिस्थापनों तथा विभिन्न कार्यालयों के लेखों के आन्तरिक आडिट तथा निरीक्षण।

6-  विभागीय लेखाओं की पूर्णतया महालेखाकार के फीगर के साथ लेखा का पुनर्निस्तीकरण तथा पावती, खर्च इत्यादि की अवधिकालिक प्रस्तुति इत्यादि, विभिन्न प्राधिकारियों      को।

7-    विभाग के खाते पर महालेखाकार द्वारा उठायी गयी बन्दोबस्त की आपत्तियां तथा रिर्पोट में सम्मिलित आडिट अभ्यावेदन पर प्रत्युत्तर की तैयारी।

8-    यात्रा भत्ता, पेंशन तथा सेनानैवृत्तिक लाभों इत्यादि प्रकरणों का निस्तारण।

9-    लेखा शाखा के अन्तर्गत अधिष्ठान सम्बन्धी समस्त कार्य तथा विभाग के नीतिगत प्रकरणों में परामर्श देने आदि सम्बन्धी कार्य।

 

लेखा परीक्षक/ज्येष्ठ लेखा परीक्षक (लेखा शाखा) के कर्तव्य एवं दायित्व

 

1-    विभागीय योजनाओं यथा-धान, चावल, गेहूँ क्रय योजनाओं में प्रयुक्त धनराशि के लेखा जोखा की जांच कर अनियमितताओं को प्रकाश में लाना।

2-    जन वितरण प्रणाली के अन्तर्गत विभिन्न विपणन केन्द्रों पर निर्गत खाद्यान्न के वितरण एवं उनकी धनराशि की वापसी की स्थिति की जांच करना।

3-   संभागों के मुख्यालयों में स्थिति संभागीय खाद्य नियंत्रकों एवं लेखाधिकारियों के कार्यालयों के राजकीय लेखा शीर्षक "4408" के अन्तर्गत हुये भुगतान सम्बन्धी अभिलेखों का      सम्प्रेक्षण, कर्मचारियों के वेतन निर्धारण, जी0पी0एफ0 एवं सेवा पुस्तिकाओं की जांच सम्बन्धी कार्य।

4-   मुख्यालय एवं संभाग स्तर पर मात्रा लेखा, फार्म "ई"  एवं लाभ हानि लेखे की जांच कर प्रोफार्मा लेखें को अन्तिम रूप देना।

5-   विभागीय लेखों का सामान्य एवं विशेष सम्प्रेक्षण करना।

6-   ज्येष्ठ लेखा परीक्षकों द्वारा उपरोक्त कार्यों के अतिरिक्त आडिट टीम के प्रभारी के रूप में कार्य करते हुए सम्प्रेक्षण, विशेष सम्प्रेक्षण में प्रकाश में आयी अनियमितताओं/हानि के  लिए उत्तरदायी अधिकारियों/कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट करना।

 

सहा0 लेखाकार/लेखाकार के कर्तव्य एवं दायित्व

मुख्यालय स्तरः-

1-     भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न क्रय योजनाओं से सम्बन्धित उद्ग्रहण एवं आर्थिक लागत मूल्य के प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित करना।

2-      अनुदान संख्या-21 के अन्तर्गत लेखाशीर्षक 1456, 2049, 4408  एवं 6003 के आय व्ययक अनुमान तैयार कर शासन से धनराशि की व्यवस्था कराना।

3-      लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अन्तर्गत वितरित होने वाले खाद्यान्न पर देय सब्सिडी के विपत्र तैयार कर भारत सरकार से अनुदान प्राप्त करना।

4-          सी0सी0एल0  हेतु प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को प्रेषित करना।

5-       वैट से सम्बन्धित विवरण तैयार कर व्यापार कर विभाग में प्रस्तुत करना।

6-      संभागीय कार्यालयों के कर्मचारियों के अधिष्ठान/सेवा सम्बन्धी प्रकरणों का निस्तारण करना।

7-      शासन से लेखा शीर्षक "4408" में प्राप्त बजट को संभागीय/जिला स्तरीय कार्यालय में वितरित करना और उसका लेखा तैयार करना।

8-      लेखा शीर्षक "1456" में हुयी प्राप्तियों का लेखा तैयार करना। लेखा शीर्षक 6003 एवं 2049 के अन्तर्गत कोषागार से धनराशि आहरण कर मूलधन/ब्याज का प्रतिदान     करना।

9-       प्रोफार्मा लेखें को अन्तिम रूप देना।

10-      नीतिगत प्रकरणों पर राय देना।

11-      चीनी व्यवसाय हेतु मार्जिन मनी के प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित करना।

12-         लेखाकारों द्वारा उपरोक्त कार्यो के साथ-साथ सम्बन्धित अनुभागों के पर्यवेक्षणीय दायित्वों का निर्वहन करते हुये प्रभावी अनुश्रवण करना एंव शासन स्तर पर पैरवी          करने सम्बन्धी कार्य।
 

संभाग स्तरः-
 

    संभाग स्तर पर वरिष्ठ/वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय स्थापित है, जिसके द्वारा निम्न कार्य सम्पादित किये जाते है।खाद्य तथा रसद विभाग, में प्रचलित विभिन्न क्रय योजनाओं तथा जन वितरण प्रणाली के अन्तर्गत विपणन केन्द्रों द्वारा किये गये क्रय/विक्रय तथा खाद्यान्न निर्गमन के कार्य से सम्बन्धित दैनिक आदान-प्रदान सम्बन्धी अभिलेख सम्बन्धित केन्द्रों से प्राप्त कर उनका केन्द्र, जिला एवं संभागवार लेजर में अंकन करना।

     लेखा शीर्षक '4408' में गेहूँ, चावल, धान क्रय के भुगतान, हैण्डलिंग/परिवहन मद में मिलर्स/ठेकदारों को भुगतान की कार्यवाही सम्पादित करना तथा फार्म 'सी0' में लेखांकन कर उसके अनुसार संभाग का समस्त लेखा जोखा तैयार करना। संभाग स्तर पर निर्गत चेकों के कैश अनकैश की स्थिति के अनुसार बैंक रिकन्शीलियेशन का कार्य। मात्रा लेखा तैयार करना तथा इसके आधार पर संभाग स्तर की बैलेन्स शीट तैयार करना।

       

आशुलिपिक के कर्तव्य एवं दायित्व

                                 (लेखा शाखा)

                                 कुल पद : 03

 

आशुलिपिक ग्रेड-1: वित्त नियंत्रक (वेतनमान 16400-425-20000) के साथ सम्बद्ध। वित्त नियंत्रक द्वारा सौंपे गये कार्यो का निष्पादन किया जाता है।

आशुलिपिक ग्रेड-2 : उप मुख्य लेखाधिकारी (वेतनमान 10000-325-15200) के साथ सम्बद्ध। अधिकारी द्वारा सौंपे गये कार्यों का निष्पादन किया जाता है।