अध्‍याय -12

खाद़य एवं रसद विभाग अनुदान/राजकीय सहायता कार्यक्रमों के क्रियान्‍वयन की रीति

1.    बी0पी0एल0 योजना
भारत सरकार द्वारा प्रदेश हेतु गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों का अधिकतम लक्ष्य 106.79 लाख निर्धारित है। इनमें निर्धनतम निर्धन 40.945 लाख परिवारों का लक्ष्य अन्त्योदय अन्न योजना में तथा 65.845 लाख परिवारों का लक्ष्य बी0पी0एल0 योजना के अन्तर्गत निर्धारित है। प्रदेश में बी0पी0एल0 परिवारों को गेंहूँ व चावल मिलाकर कुल 35 किलो0 खाद्यान्न प्रति माह उपलब्ध कराया जाता है।

            इस योजना के अन्तर्गत गेंहूँ रू0 4.65 प्रति किग्रा0 तथा चावल रू 6.15 प्रति किग्रा0 की दर पर बी0पी0एल0 कार्ड धारक को मिलता है।

2.    अन्त्योदय अन्न योजना

            इस योजना का उद्देश्य निर्धनतम-निर्धन परिवारों को जिनमें बी0पी0एल0 की दरों पर खाद्यान्न क्रय करने की शक्ति नहीं है, उन्हें अन्त्योदय अन्न योजना के अन्तर्गत विशेष रियायती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 40.945 लाख परिवार अन्त्योदय अन्न योजना के अन्तर्गत चिन्हित हैं। इस योजना के अन्तर्गत प्रति माह अन्त्योदय कार्डधारकों को 35 किग्रा0 खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। प्रदेश के अन्तर्गत बी0पी0एल0 परिवारों एवं अन्त्योदय परिवारों का चिन्हीकरण कराकर उन्हें राशन कार्ड निर्गत करने का दायित्व जनपदों में जिलाधिकारियों को सौंपा गया है।

            अन्त्योदय अन्न योजना के अन्तर्गत रूपया 2.00 प्रति किग्रा0 की दर से गेंहूँ तथा रूपया 3.00 प्रति किग्रा0 की दर पर चावल लाभार्थी परिवारों को उपलब्ध कराया जाता है।

3.    ए0पी0एल0 योजना

            गरीबी रेखा के ऊपर जीवन यापन करने वाले परिवारों को उपलब्धता के आधार पर 35 किग्रा0 खाद्यान्न प्रतिमाह देने की व्यवस्था है इस योजना में खाद्यान्न का वितरण भारत सरकार से प्राप्त आवंटन के अनुसार ही किया जाता है।ए0पी0एल0 कार्डधारकों हेतु गेंहूँ का मूल्य रू0 6.60 प्रति किग्रा0 तथा चावल का मूल्य रू0 8.45 प्रति किग्रा0 निर्धारित है।

मिट्टी तेल :-

            भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए माह मार्च, 2001 तक लगभग 1 लाख 42 हजार किलोलीटर मिट्टी का तेल प्रतिमाह आवंटित किया जा रहा था। अप्रैल, 2005 से भारत सरकार से मात्र 132973.00 किलोलीटर मिट्टी का तेल प्रतिमाह आवंटित किया जा रहा था। भारत सरकार से प्राप्त हो रहे मिट्टी के तेल को वर्तमान में ए0पी0एल0, बी0पी0एल0 एवं अन्त्योदय श्रेणी के राशनकार्ड धारकों को उपलब्ध कराया जाता है। प्रदेश में गैस धारक राशनकार्ड धारक को 03 लीटर तथा बिना गैस धारक राशनकार्ड धारक को 05 लीटर तक प्रति कार्ड मिट्टी तेल के वितरण की व्यवस्था निर्धारित है। इसका फुटकर बिक्री मूल्य जनपदों में दूरी के हिसाब से अधिकतम रूपये 9.55 से रूपये 10.55 तक (जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित दर)  प्रति लीटर निर्धारित है।

            मिट्टी के तेल की वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने हेतु उचित दर विक्रेताओं द्वारा थोक विक्रेताओं से उठान का तिथि निर्धारण तथा पर्यवेक्षण अधिकारी के समक्ष वितरण हेतु तिथि निर्धारित करते हुए जिलाधिकारी के माध्यम से रोस्टर बनाये जाने की कार्यवाही की गयी है।जनपद में माननीय जनप्रतिनिधियों को प्रतिमाह दुकानदार वार उठान एवं वितरण की तिथि सूचित करने की व्यवस्था की गयी है।

            मिट्टी के तेल की ट्रैकिंग व्यवस्था के लिए आयल कम्पनियों द्वारा डिपो से टैंकर के प्रस्थान की सूचना जिला पूर्ति अधिकारी को दिए जाने की व्यवस्था की गई है।

            प्रथम स्तर पर टैंकर पहुँचने पर भूमिगत टैंक  में जिलाधिकारी द्वारा नामित अधिकारी के समक्ष टैंकर को अनलोड कराये जाने एवं द्वितीय स्तर पर थोक विक्रेता के गोदाम से उचित दर विक्रेता को मिट्टी के तेल की निकासी के समय जिलाधिकारी द्वारा तैनात कर्मचारीगण द्वारा निकासी अपने समक्ष कराये जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गयी है। तृतीय स्तर पर उचित दर विक्रेता की दुकान पर मिट्टी के तेल की आवक का सत्यापन स्थानीय ग्राम पंचायत अधिकारी/लेखपाल/पूर्ति निरीक्षक (शहरी क्षेत्र में) द्वारा किये जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गयी है।

ग्रामीण खाद्यान्न बैंक योजना -

            पूर्वान्चल के छ: जनपदों-मिर्जापुर, सोनभद्र, चन्दौली, गाजीपुर, मऊ तथा बलिया एवं बुन्देलखण्ड के सात जनपदों:- झाँसी, जालौन, ललितपुर, बाँदा, हमीरपुर, महोबा तथा चित्रकूट में ग्रामीण खाद्यान्न योजना विगत मार्च/अप्रैल, 2007 से लागू है। इन जनपदों में झाँसी में 29, जालौन में 29, ललितपुर में 28, बाँदा में 28, हमीरपुर में 29, महोबा में 28, चित्रकूट में 28, चन्दौली में 50, गाजीपुर में 50, सोनभद्र में 50, मऊ में 50 तथा बलिया में 50 इस प्रकार कुल 500 ग्रामीण खाद्यान्न बैंक खोले गये हैं और प्रत्येक बैंक से 40-40 लाभार्थी इस प्रकार कुल 20000 लाभार्थी बैंकों से सम्बद्ध किये गये हैं। बैंक से सम्बद्ध लाभार्थियों को प्रति लाभार्थी नि:शुल्क 01 कुं0 खाद्यान्न उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था है। इस खाद्यान्न की वापसी एक वर्ष की समान किश्तों में लाभार्थी को बैंक को वापस करनी आवश्यक है। उपर्युक्त जनपदों में मिर्जापुर, सोनभद्र, चन्दौली, गाजीपुर, मऊ तथा बलिया नक्सल प्रभावित जनपद हैं। माह दिसम्बर, 2008 तक इन बैंकों  से 18320 लाभार्थियों द्वारा 16647.98 कुं0 खाद्यान्न प्राप्त किया गया है जिसमें से खाद्यान्न बैंकों को 2788.10 कुं0 खाद्यान्न वापस प्राप्त हो चुका है।

            इसके अतिरिक्त भारत सरकार द्वारा 781 नये खाद्यान्न बैंक खोले जाने की अनुमति दी गयी है। जिसके लिए पूर्व संचालित 13 जनपदों के अतिरिक्त 13 अन्य  जनपदों में नये खाद्यान्न बैंक खोले जाने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गई है।

विकेन्द्रीकृत प्रणाली के अन्तर्गत खाद्यान्न की खरीद

            मूल्य समर्थन योजना के अन्तर्गत खाद्यान्न की खरीद भारत सरकार की प्रायोजित योजनाएं हैं। इसके अन्तर्गत किसानों को उनके उत्पादन (गेंहूँ एवं धान) की सरकारी खरीद भारत सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर क्रय केन्द्रों की स्थापना कर की जाती है। इसका उद्देश्य किसानों को समर्थन मूल्य प्रदान करने के साथ-साथ लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में वितरण हेतु गेंहूँ एवं चावल की आवश्यकता के अनुरूप भण्डारण सुनिश्चित करना है।

            वर्ष 1999 से उत्तर प्रदेश में भारत सरकार की विकेन्द्रीकृत क्रय योजना लागू है। इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश में विभिन्न क्रय योजनाओं के अन्तर्गत क्रय किये गये खाद्यान्न में से लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली की वार्षिक आवश्यकता के समतुल्य मात्रा में खाद्यान्न का भण्डारण स्टेटपूल में किया जाता है तथा वार्षिक आवश्यकता से अधिक उद्ग्रहण किये जाने वाली मात्रा केन्द्रीयपूल हेतु भारतीय खाद्य निगम को सम्प्रदान की जाती है।