15 सरकारी सेवकों को पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्तिक लाभ

1.    प्राक्कथन

            नियमित रूप से नियुक्त सरकारी सेवकों को उनके द्वारा की गयी सरकारी सेवा अवधि के उपलक्ष में सेवानिवृत्ति के उपरान्त एक निश्चित आवर्तक तथा अनावर्तक धनराशि का भुगतान राज्य सरकार द्वारा सेवानिवृत्तिक लाभ के रूप में दिया जाता है। पेंशन विषयक नियम सिविल सर्विस रेगुलेशन्स में दिये गये हैं। उत्तर प्रदेश लिबराइज्ड पेंशन रूल्स 1961, उत्तर प्रदेश रिटायरमेन्ट बेनीफिट्स रूल्स 1961, नयी पारिवारिक पेंशन योजना 1965 आदि लाभकारी नियम बनाकर इन सुविधाओं को और अधिक उदार व लाभप्रद बनाया गया। सिविल सेवा नियमावली एवं उत्तर प्रदेश सेवानिवत्ति प्रसुविधाएँ नियमावली, 1961, तथा सरकार द्वारा समय-समय पर निर्गत शासनादेशों एवं परिपत्रों के अनुसार सेवानिवृत्त सरकारी सेवकों को निम्नलिखित प्रसुविधाएँ एवं लाभ प्रदत्त हैं :-

2.    प्रदत्त प्रसुविधाएँ

3.    पेंशन का अधिकार

            वित्तीय हस्त पुस्तिका खण्ड दो भाग 2 से 4 के मूल नियम 56 के उपनियम (ड) में उपलब्ध है कि नियम 56 के अधीन अधिवर्षिता पर सेवानिवृत्त होने वाले, स्वेच्छा से सेवानिवृत्त होने वाले एवं अनिवार्य सेवानिवृत्त किये गये, प्रत्येक सरकारी सेवक को, सुसंगत नियमों एवं उपबन्धों के अधीन एवं उनके अनुरूप पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति प्रसुविधाएँ देय होंगी। पेंशन पाने का अधिकार उसकी सम्पत्ति है।

            सी.एस.आर. के प्रस्तर-361 के अनुसार निम्नलिखित तीन शर्तों के पूर्ण होने पर ही सरकारी सेवक की सेवा पेंशन के लिए अर्ह होगी :

            (1)    सेवा सरकार के अधीन हो,

            (2)    सेवायोजन मौलिक एवं स्थायी हो,

            (3)    सेवा के लिए भुगतान सरकार द्वारा किया जाता हो।

            किन्तु शासनादेश संख्या सा-3-1152/दस-915/89, दिनांक 01 जुलाई 1989, शासनादेश संख्या-सा-3-1380/दस-2001-301(40)/2001, दिनांक 31 जुलाई, 2001, शासनादेश संख्या-सा-3-1713/दस-87-933/89, दिनांक 28 जुलाई, 1989 के अनुसार अधिवर्षिता, स्वेच्छा, अनिवार्य अशक्तता एवं प्रतिकर पेंशन कतिपय शर्तों के अधीन अस्थायी सरकारी सेवकों को भी सेवानिवृत्तिक लाभ अनुमन्य हैं।

4.    पेंशन की कोटियाँ :-

                                                1.    स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति

                                                2.    अनिवार्य सेवा निवृत्ति

4.1    प्रतिकर पेंशन

                सी.एस.आर. के प्रस्तर 426 के अनुसार किसी स्थायी पद के समाप्त होने के फलस्वरूप सेवा-मुक्त किये गये स्थायी सरकारी सेवक को यदि किसी अन्य पद पर नियुक्त न किया जाये, तो उसे यह विकल्प उपलब्ध रहता है कि

(i)    उसके द्वारा की गयी अर्हकारी सेवा के लिए नियमानुसार अनुमन्य पेंशन को प्रतिकर पेंशन के रूप में स्वीकृत किया जाए

अथवा

(ii)    किसी अन्य पद पर नियुक्ति को स्वीकार कर लें तथा पूर्व पद पर की गयी सेवा अवधि की गणना पेंशन हेतु की जाए।

शासनादेश संख्या-सा-3-1713/दस-87-933/89, दिनांक 28 जुलाई, 1989 के संलग्नक-1-सी(ii) पेंशन स्वीकर्ता अधिकारियों के लिए दिशा निर्देश के बिन्दु 11(2) के अनुसार अस्थाई सरकारी सेवक प्रतिकर पेंशन हेतु अर्ह है।

4.2    अशक्तता पेंशन

            अशक्तता पेंशन सी.एस.आर. के प्रस्तर 441 से 457 में उल्लिखित व्यवस्था के अनुसार शारीरिक अथवा मानसिक अशक्तता के परिणामस्वरूप स्थायी रूप से अशक्त हो जाने की दशा में संबंधित सरकारी सेवक द्वारा सक्षम चिकित्सा अधिकारी से निर्धारित प्रारूप में अशक्तता चिकित्सा प्रमाण पत्र प्राप्त कर नियुक्ति प्राधिकारी को प्रस्तुत किये जाने पर अशक्तता पेंशन अनुमन्य होती है तथा उसे अशक्तता प्रमाण पत्र जारी होने के दिनांक से सेवानिवृत्ति माना जायेगा। प्रमाण पत्र में स्पष्ट रूप से प्रमाणित किया जाना चाहिए कि उसकी अशक्तता/अयोग्यता सरकारी सेवक की अनियमित अथवा असंयमित आदतों के परिणामस्वरूप नही हुई है।

            अशक्तता की दशा में सेवानिवृत्ति होने वाले सरकारी कर्मचारी को अनुमन्य पेंशन धनराशि किसी भी दशा में उस धनराशि से कम नही होगी जो उसके परिवार को उक्त तिथि पर उसकी मृत्यु होने की दशा में नयी पारिवारिक पेंशन योजना के अधीन उस समय पारिवारिक पेंशन के रूप में देय होगी।

            शासनादेश संख्या-सा-3-1152/दस-915/89, दिनांक 01 जुलाई, 1989 के अनुसार अस्थाई सरकारी सेवक भी अशक्तता पेंशन हेतु अर्ह है।

4.3    अधिवर्षता पेंशन

            प्रत्येक सरकारी सेवक जिस माह में 60 वर्ष की आयु प्राप्त करता है, उस माह के अन्तिम दिन के अपरान्ह में सेवानिवृत्त हो जाता है। ऐसी सेवानिवृत्ति को अधिवर्षता कहते हैं। सी.एस.आर. के प्रस्तर 458 के अनुसार अगर सरकारी सेवक की जन्मतिथि माह का प्रथम दिवस है तो सरकारी सेवक पिछले माह के अन्तिम दिवस को सेवानिवृत्त होगा। इसके अतिरिक्त जन्मतिथि अगर माह के प्रथम दिवस को छोड़कर है तो उसी माह के अन्तिम तिथि को सेवानिवृत्त होगा। अधिवर्षता पर 10 वर्ष की नियमित एवं अर्हकारी सेवा पूर्ण करने वाले सभी सेवकों को अधिवर्षता पेंशन की सुविधा अनुमन्य है।

4.4    सेवानिवृत्तिक पेंशन

    4.4.1 अनिवार्य सेवानिवृत्ति :

                नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा किसी ऐसे सेवक जिसने 50 वर्ष की आयु प्राप्त कर ली हो, तीन माह का नोटिस अथवा उसके बदले में वेतन तथा भत्ता देकर जनहित में सेवानिवृत्त किया जा सकता है। इस प्रकार की सेवानिवृत्ति को अनिवार्य कहा जाता है। मूल नियम 56 ई के अनुसार प्रत्येक सरकारी सेवक को सेवानिवृत्तिक पेंशन एवं अन्य लाभ देय होंगे। शासनादेश संख्या-सा-3-1380/दस-2001-301(40)/2001, दिनांक 31 जुलाई 2001, के अनुसार अस्थाई सरकारी सेवक को भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति की स्थिति में सेवानिवृ‍त्तिक लाभ देय हैं।

    4.2.2    स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति :

                कोई सरकारी सेवक जिसने 45 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो या जिसकी 20 वर्ष की अर्हकारी सेवा की गयी हो, नियुक्ति प्राधिकारी को तीन माह की नोटिस देकर स्वेच्छा से सेवानिवृत्त हो सकता है। परन्तु प्रतिबन्ध यह है कि ऐसे सरकारी सेवक द्वारा जिनके विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही विचाराधीन या आसन्न हो, दी गयी नोटिस तभी प्रभावी होती है, जब उसे नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा स्वीकार कर लिया जाये। स्वेच्छा से सेवानिवृत्त होने के लिए सरकारी सेवक द्वारा दी गयी नोटिस नियुक्ति प्राधिकारी की अनुज्ञा के बिना वापस नहीं लिया जा सकता है। स्वेच्छा से सेवानिवृत्त होने वाले सरकारी सेवक की सेवा अवधि के आगणन में 5 वर्ष या अधिवर्षता आयु प्राप्त होने पर सेवानिवृत्त होने में जितना अवधि शेष रहती हो, इन दोनों अवधियों में से जो भी कम हो, उस अवधि का अतिरिक्त लाभ अनुमन्य होता है, परन्तु यह लाभ उस सरकारी सेवक को प्रदान नहीं किया जा सकता, जिसकी सत्यनिष्ठा संदिग्ध हो।

4.5    असाधारण पेंशन

            उत्तर प्रदेश सिविल सर्विसेज (एक्सट्रा आर्डिनरी पेंशन) नियमावली, उसकी प्रथम संशोधन नियमावली 1981 व द्वितीय संशोधन नियमावली 1983 तथा शासनादेश संख्या सा-3/1340/दस-916-88 दिनांक 19-8-1988 व शासनादेश संख्या सा-3-1145/दस-916/88 दिनांक 17-8-1993 के अनुसार जब कोई कर्मचारी अपने पद के जोखिम के परिणाम स्वरूप मारा जाता है या लगी चोट से मर जाता है तो उसके परिवार को असाधारण पेंशन, तात्कालिक सहायता व अनुग्रह धनराशि देय होती है। मृत्यु के प्रकरणों के अतिरिक्त उक्त शासनादेश दिनांक 13-8-1998 व शासनादेश दिनांक 17-8-1993 के अनुसार कर्तव्य पालन के दौरान जो सेवक विशेष जोखिम की परिस्थितियों में गम्भीर रूप से घायल हो जाने के कारण सेवा में बनाये रखने के योग्य न रह जाय तो ऐसे सेवकों को भी मृत्यु के प्रकरणों की भांति असाधारण पेंशन, तात्कालिक सहायता व अनुग्रह धनराशि देय होती है। शासनादेश संख्या सा-3-ए-41/दस-918-81 दिनांक 12-8-1983 के अनुसार असाधारण पेंशन पर भी उन्हीं दरों पर राहत अनुमन्य है जिन दरों पर उत्तर प्रदेश लिबराइज्ड पेंशन स्कीम 1961, उत्तर प्रदेश रिटायरमेन्ट बेनीफिट्स रूल्स 1961 और नई पारिवारिक पेंशन स्कीम 1965 के अधीन प्राप्त पेंशन पर राहत दी जाती है। असाधारण पेंशन की स्वीकृति शासन द्वारा प्रदान की जाती है।

4.6    एक्सगेशिया पेंशन

            एक्सग्रेशिया पेंशन उन सेवकों को देय होती है जो सेवा के दौरान अन्धे या विकलांग हो जाय और जिन्हें नियमों के अन्तर्गत कोई पेंशन देय न हो। शासनादेश संख्या सा-2-574/दस-942/75 दिनांक 19-6-76 के अनुसार यह योजना दिनांक 19-6-76 से लागू है।

5.    पेंशन स्वीकृतकर्ता प्राधिकारियों को जानने योग्य कुछ प्रमुख बिन्दु

  1. पेंशन प्रकरण प्राप्त होते ही इसे मास्टर इण्डैक्स तथा चेक रजिस्टर में अंकित करें, जिसका प्रारूप शासनादेश संख्या सा-3-1446/दस-912/85 दिनांक 5 अगस्त, 1985 में दिया हुआ ह। ये दोनों अभिलेख स्थायी है।

  2. पेंशन युक्त पद पर सेवाओं के लिए पेंशन देय होती है, यह देख लिया जाय कि सेवायें पेंशन युक्त पद की ही है। सामान्यतया स्वीकृत अधिष्ठान की स्थायी/अस्थायी सेवायें पेंशनयुक्त है।

  3. नियत वेतन, अवधि विशिष्ट कार्य हेतु सृजित पद, आकस्मिक व्यय से भुगतान की गयी सेवायें पेंशन युक्त नहीं है।

  4. विभागीय/न्यायिक कार्यवाही से आच्छादित मामलों में अन्तिम रूप से पेंशन नहीं स्वीकृत की जायेगी। ऐसे मामलों में कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष द्वारा मामले में अन्तिम निर्णय तक अनन्तिम पेंशन स्वीकृत की जायेगी, किन्तु ग्रेच्युटी रूकी रहेगी।

  5. पेंशन स्वीकृत न होने की दशा में कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष पूरी सेवा पेंशन तथा मृत्यु की दशा में 90 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन अनन्तिम रूप से स्वीकृत कर देंगे और ग्रेच्युटी एक माह के वेतन या रू0 3000/- (जो भी कम हो) रोक कर स्वीकृत की जायेगी जो अन्तिम भुगतान में से समायोजित की जायेगी।

  6. पेंशन प्रपत्र :-    सेवा पेंशन हेतु प्रपत्र भाग-1, 3 (दो प्रतियों में) 4 तथा 5 ठीक से भरे होने चाहिए। मृत्यु की दशा में पारिवारिक पेंशन हेतु पेंशन प्रपत्र-1 भाग-1 के बजाय भाग-2 भरा जायेगा, शेष उक्तानुसार होंगे। प्रविष्टियाँ, फोटो एवं हस्ताक्षर कार्यालयाध्यक्ष द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए।

  7.  अर्ह सेवा की पुष्टि में सेवापुस्तिका/सेवारोल अथवा सेवा विवरण होना चाहिए।

  8. जन्मतिथि-    सेवा में प्रवेश के समय सेवा पुस्तिका में अंकित जन्मतिथि को मान्यता दी जानी चाहिए। इस तिथि में अपर लेखन की दशा में इसे हाईस्कूल के प्रमाण-पत्र के आधार पर तथा जो हाईस्कूल पास नहीं है उनके लिए अन्य प्रमाणों के आधार पर विभागाध्यक्ष प्रमाणित किया जाना चाहिए।

  9. यदि कोई सरकारी सेवक त्रुटिवश अथवा अन्यथा अधिवर्षता की आयु के उपरान्त भी सेवा में बना रहता है तो उसकी पेंशन अधिवर्षता की वास्तविक तिथि के अन्तिम दस माह के औसत वेतन तथा उस तिथि तक की गयी सेवा के आधार पर स्वीकृत की जानी चाहिए। ग्रेच्युटी भी अधिवर्षता की तिथि तक की गयी सेवा के आधार पर दी जानी चाहिए। अधिवर्षता तिथि के उपरान्त की गयी सेवा से संबंधित वेतन आदि के अधिक भुगतान का उत्तरदायित्व निर्धारित करके दोषी सरकारी सेवक से इसकी वसूली की जायेगी।

  10. पेंशन हेतु अर्ह सेवा आगणित करने के लिए यह सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है कि :

            (1)    सेवा सरकार के अधीन हो।

          (2)    सेवा मौलिक तथा स्थायी हो किन्तु 1-6-1989 के बाद अधिवर्षता, स्वेच्छा, अशक्तता तथा प्रतिकर पेंशन पर सेवानिवृत्त होने वाले सरकारी सेवकों के लिए स्थायी होना अनिवार्य नहीं है। इन प्रकरणों में 10 वर्ष की नियमित सेवा पर अर्ह सेवा की गणना स्थायी की भाँति की जायेगी।

            (3)    सेवा के सरकारी कोष से भुगतान होना चाहिए। इस शर्त की पुष्टि वेतन पंजी तथा सेवा प्रमाण से की जायेगी।

  1. सेवा में व्यवधान की अवधि मर्षित किये जाने पर भी ऐसे व्यवधान की अवधि अर्हकारी सेवा में नहीं जोड़ी जायेगी। अवैतनिक अवकाश की अवधि जो चिकित्सा प्रमाण-पत्र के आधार पर नहीं है, पेंशन हेतु अर्ह नही होगा।

  2. सेवा में व्यवधान के मामले में सिविल सर्विस रेन्युलेशन के अनुच्छेद 422 से आच्छादित है। यदि यह व्यवधान त्याग पत्र देने, हड़ताल में भाग लेने के कारण अथवा सेवा से निकाल देने के कारण नही हुआ है तो स्वत: मर्षित मान लिया जायेगा। यदि इस अनुच्छेद के अन्तर्गत सेवा की दो अवधियों के मध्य हुए व्यवधान/व्यवधानों का मर्षण नहीं किया गया है तो व्यवधान से पूर्व की सेवा अवधि अर्हकारी सेवा नहीं मानी जायेगी।

  3. शासनादेश संख्या: सा-3-35/दस-07-101(6)-2005 दिनांक 16 जनवरी, 2007 के अनुसार पेंशन प्राधिकार पत्र को निर्गत करने के लिए प्राधिकृत अधिकारी द्वारा पेंशन प्रपत्रों की जाँच करते समय सेवानिवृत्त कर्मचारी के वेतन निर्धारण की संनिरीक्षा की अवधि का निर्धारण निम्नवत किया गया :

         1-    समय-समय पर यह प्रश्न उठाया जाता रहा है कि पेंशन प्राधिकार-पत्र को निर्गत करने के लिए प्राधिकृत अधिकारी द्वारा पेंशन प्रपत्रों की जाँच करते समय सेवानिवृत्त कर्मचारी के वेतन निर्धारण की संनिरीक्षा किस सीमा तक की जाए। इस विषय पर पिछली बार जो शासनादेश संख्या-सा-3-1952/दस-933/89 टी0सी0, दिनांक 05 दिसम्बर, 2001 को जारी किया गया है उसमें निम्नांकित व्यवस्था है :-

            "यदि सरकारी सेवक के अन्तिम 10 माह के पूर्व किसी अवधि में गलत वेतन निर्धारण परिलक्षित होता है, जिसके कारण राज्य सरकार को वित्तीय क्षति हुई है तो राज्य सरकार को वित्तीय क्षति से बचाने के उद्देश्य से, उस तथ्य की जानकारी उसके कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष से करायी जाय और कार्यालयाध्यक्ष/ विभागाध्यक्ष द्वारा आवश्यक कार्यवाही करने के उपरान्त ही सुसंगत नियमों के अन्तर्गत परीक्षणोपरान्त प्राधिकार-पत्र निर्गत किया जाय।"

            "पेंशन प्रकरणों के निस्तारित करते समय शासन के हितों का विशेष ध्यान अवश्य रखा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि शासन को किसी भी स्थिति में वित्तीय क्षति न हो।"

2-    शासन स्तर से निर्गत उपरोक्त आदेशों के आधार पर पेंशन प्राधिकर्ता अधिकारी द्वारा सेवा-निवृत्त कर्मचारी की केवल सेवा-निवृत्ति के पूर्व के 10 महीनों की परिलब्धियों की ही नहीं बल्कि सेवा पुस्तिका/अभिलेखों के आधार पर दिनांक 01 जनवरी, 1986 से पुनरीक्षित वेतनमानों में वेतन निर्धारण से लेकर आगे समय-समय पर हुये वेतन निर्धारण की संनिरीक्षा भी की जा रही है जिससे पेंशन प्राधिकार-पत्र निर्गत करने में विलम्ब होने के अलावा कतिपय अन्य कठिनाइयाँ भी प्रकाश में आयी हैं।

3-    अधिवर्षता पेंशन और मृत्यु तथा सेवानिवृत्ति आनुतोषिक की अदायगी में होने वाले विलम्ब आदि को दूर करने के उद्देश्य से कार्य-विधि का सरलीकरण विषय पर वित्त विभाग द्वारा निर्गत शासनादेश संख्या-सा-3-2085/दस-907/76, दिनांक 13 दिसम्बर, 1977 के प्रस्तर-2 के उप प्रस्तर-2(ग) का निम्नांकित अंश विशेष रूप से अवलोकनीय है :-

             "इस कार्य में केवल औसत परिलब्धियों के लिए गणितात्मक (Arithmetical) संगणना ही अन्तर्ग्रस्त नहीं है बल्कि परिलब्धियों की सत्यता की जाँच भी करानी होगी। परिलब्धियों की सत्यता स्वभावत: इस बात पर निर्भर करेगी कि इस दस माह की अवधि के आरम्भ होने वाली पहली तारीख को प्राप्त परिलब्धियाँ भी सहीं हों। परन्तु पहले की परिलब्धियों की सत्यता की जाँच, चाहे पेंशन के कागज, तैयार करने वाले कार्यालय में हों अथवा बाद में पेंशन अदायगी आदेश जारी करने के लिये जिम्मेदार कार्यालय में हों, गहरी छान-बीन हेतु काफी पीछे जाने का अवसर नहीं होना चाहिए, कम से कम उतनी जाँच की जानी चाहिये जो अनिवार्य रूप से आवश्यक है। किसी भी स्थिति में उक्त  जाँच सेवा-निवृत्ति की तारीख से पूर्व के 34 महीने की अवधि से अधिक अवधि के सम्बन्ध में करने की आवश्यकता साधारणतया नहीं होनी चाहिए।"

4-     शासन के उपरोक्त आदेश अभी तक प्रभावी हैं परन्तु संदर्भित शासनादेश दिनांक 05 दिसम्बर, 2001 में दिये गये निर्देशों को देखते हुए पेंशन प्राधिकर्ता अधिकारी दिनांक 01 जनवरी, 1986 से पुनरीक्षित वेतनमानों में वेतन निर्धारण तक की जाँच भी करने लगे हैं जिससे पेंशन प्राधिकार-पत्र निर्गत करने में विलम्ब होता है। अत: इस सम्बन्ध में सम्यक, विचारोपरान्त राज्यपाल महोदय द्वारा निम्नांकित आदेश प्रदान किये गये हैं :-

(1)    उक्त संदर्भित शासनादेशों दिनांक 13 दिसम्बर, 1977 के उपरोक्त प्रावधान के ही अनुसार पेंशन स्वीकर्ता अधिकारी द्वारा पेंशन  स्वी‍कृति हेतु सेवानिवृत्ति की तारीख से 10 माह पूर्व की परिलब्धियाँ तथा उसके 02 वर्ष पूर्व अर्थात कुल 34 महीने का रिकार्ड ही देख जायेगा।

(2)    पेंशन स्वीकर्ता अधिकारी का किसी कर्मचारी के सेवाकाल में वेतन के निर्धारण में त्रुटि को ठीक कराने का दायित्व उपरोक्त (1) में निर्धारित सीमा से अधिक नही होगा। वेतन-निर्धारण की त्रुटियों को कर्मचारी के सेवारत रहते हुए ही सामान्य जाँच/आडिट के माध्यम से दूर किये जाने की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाय।

6.    अर्हकारी सेवा की गणना

  1. सेवानिवृत्ति की तिथि से सेवा में प्रवेश की तिथि घटाने पर अर्ह सेवा। 20 वर्ष की आयु पूर्ण करने से पूर्व की गयी सेवा पेंशन हेतु अर्ह नहीं मानी जायेगी।

  2. पूर्व की सैन्य सेवा जिस पर सेना से पेंशन प्राप्त नहीं हुई है (सी0एस0आर0 के अनुच्छेद-356) और उस सेवा के लिए सेना से प्राप्त उपादान सरकारी कोष में जमा कर दिया गया है। इसकी पुष्टि हेतु अपेंडिक्स ए पर सेना कार्यालय से सेवा सत्यापित होनी चाहिए।

  3. यदि किसी कर्मचारी ने भारत सरकार में सेवा की है और उसके उपरान्त राज्य सरकार में नियुक्ति हो जाती है तो ऐसी दशा में शासनादेश संख्या सा-3-1239/दस-917/70 दिनांक 13-9-1982 सपठित शासनादेश संख्या सा-3-882/दस-913/84 दिनांक 9-4-1985 के अनुसार भारत सरकार के अधीन की गयी सेवा जोड़ी जायेगी।

  4. यदि किसी कर्मचारी ने केन्द्र सरकार/राज्य सरकार के निगम या उपक्रम में सेवा की है तो सम्पूर्ण सेवा पेंशन हेतु अर्हकारी सेवा मानी जायेगी। शासनादेश संख्या सा-3-1163/दस-92 दिनांक 10-7-1992 के अनुसार अब केन्द्र सरकार से राज्य सरकार की सेवा में आने वाले तथा राज्य सरकार की सेवा से केन्द्र सरकार की सेवा में जाने वाले कर्मचारियों के प्रकरणों में पेंशनीय दायित्व को दोनों सरकारों के मध्य कर्मचारी की सेवा के अनुपात में वहन किये जाने की प्रथा को समाप्त कर दिया गया है।

  5. सेवा में व्यवधान यदि संबंधित कर्मचारी द्वारा त्याग पत्र देने, शासन द्वारा सेवा बर्खास्त किये जाने, निकाल दिये जाने के कारण अथवा हड़ताल में भाग लेने के कारण हुए हैं तो पूर्व सेवाकाल अर्हकारी सेवा नहीं मानी जायेगी।

  6. यदि कोई सरकारी कर्मचारी/अधिकारी किसी निगम/सार्वजनिक उपक्रम/स्थानीय निकाय अथवा किसी भी स्वायत्तशासी संस्था में वाह्य सेवा पर स्थानान्तरित होता है तो उसकी वाह्य सेवावधि का पेंशन/अवकाश वेतन अंशदान, वाह्य सेवायोजक/संबंधित सरकारी कर्मचारी द्वारा जमा किया जाना अपेक्षित होता है। पेंशनरी अंशदान जमा न होने पर संबंधित अवधि पेंशन हेतु अर्ह नहीं मानी जाती है। शासनादेश संख्या जी-1-184/दस-2001-534/(1)/93 दिनांक 29-5-2001 के अनुसार स्वीकर्ता अधिकारी, संबंधित कार्मिक को सार्वजनिक उपक्रम की तैनाती की अवधि के लिए पेंशन/अवकाश वेतन अंशदान को राजकीय कोषागार में जमा किये जाने की पुष्टि करेंगे। यदि उक्त आशय कि पुष्टि नहीं होती है तो स्वीकर्ता अधिकारी पेंशन स्वीकृत करते समय उस अवधि के लिए पेंशन स्वीकृत नहीं करेंगे जिस अवधि के लिए अंशदान जमा नही है। यदि कालान्तर में उक्त अंशदान जमा होने की पुष्टि हो जाती है तो उक्त अवधि के लिए पेंशन आदि स्वीकृत कर दी जायेगी। शासनादेश संख्या जी-1-1460/दस-534(38)-22 दिनांक 30-11-88 में संबंधित विभागों का लेखाशीर्षक जिसमें वाह्य सेवा अवधि का पेंशनरी/अवकाश अंशदान जमा किया जाना है का विस्तृत विवरण  दिया गया है।

  7. असाधारण अवकाश की अवधि में निम्न तीन परिस्थितियों को छोड़कर अर्हकारी सेवा नहीं मानी जायेगी :-

            (क)    सक्षम चिकित्सा अधिकारी द्वारा दिये गये चिकित्सा प्रमाण-पत्र के आधार पर।

            (ख)    नागरिक अशान्ति के कारण ड्यूटी पर जाने अथवा अथवा पुन: आने में असमर्थता के कारण।

            (ग)    उच्च तकनीकी और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए लिया गया असाधारण अवकाश।

                    शुद्ध अर्ह सेवा (1+2+3+4) - (5+6+7)

नोट:- स्वेच्छा सेवानिवृत्ति की दशा में अधिवर्षता सेवानिवृत्ति में शेष अवधि, अधिकतम 5 वर्ष तक का लाभ देय होगा।

  1. शुद्ध अर्हकारी सेवा छमाहियों में आगणित की जायेगी। 3 माह या उससे अधिक अवधि पूरी छमाही मान ली जायेगी। 66 छमाही पर अधिकतम पेंशन की देयता है।

7.    परिलब्धियाँ

                पेंशन, अर्हकारी सेवा और परिलब्धियों के अनुपात में देय होती है। पेंशन के लिए परिलब्धियों से तात्पर्य मूल नियम 9(21)(1) में परिभाषित वेतन से है इसमें वैयक्तिक वेतन अथवा विशेष वेतन शामिल नहीं होगा। किन्तु चिकित्सकों को मिलने वाला नान प्रैक्टिस भत्ता परिलब्धियों का भाग होगा।

8.    पेंशन की गणना

क-    पेंशन की गणना हेतु पिछले 10 माह की परिलब्धियों का औसत और पारिवारिक पेंशन तथा ग्रेच्युटी अंतिम आहरित परिलब्धियों के आधार पर आगणित की जायेगी। दिनांक 1-1-1996 से सेवानिवृत्ति/डेथ ग्रेच्युटी की गणना हेतु सेवानिवृत्ति/मृत्यु की तिथि को अनुमन्य मंहगाई भत्ते को भी परिलब्धियों में सम्मिलित किया जायेगा। दिनांक 1-4-2004 से मूल वेतन के साथ उसका 50 प्रतिशत मंहगाई वेतन के रूप में पेंशन हेतु औसत परिलब्धियों की गणना में आगणित किया जाएगा।

ख-    औसत परिलब्धियों की गणना करते समय सेवानिवृत्ति के पूर्व के दस माहों में अवकाश तथा निलम्बन की ऐसी अवधि जिसमें पूर्ण वेतन से कम मिला हो और यह अवधि अर्हकारी सेवा में जोड़ी जानी है तो उस अवधि के लिए यह पूर्ण वेतन जोड़ा जायेगा, जिसे वह अवकाश अथवा निलम्बन न होने की दशा में प्राप्त करता। अनर्ह अवकाश अवधि निलम्बन अथवा व्यवधान की अवधि निकाल दी जायेगी और उतनी पिछली अवधि शामिल कर ली जायेगी।

ग-    पेंशन 66 छमाही अर्हकारी सेवा पर औसत परिलब्धियों का 50 प्रतिशत होगी और इसे अगले रूपया तक पूर्णांकित किया जायेगा। 66 छमाही से कम अर्हकारी सेवा पर पेंशन आनुपातिक रूप से कम हो जायेगी।

घ-    आगणन सूत्र

पेंशन  = अंतिम 10 माह की परिलब्धियों का औसत X अर्हकारी सेवा की छमाहियाँ (अधिकतम 66)
2 X 66

(क)    दिनांक 1-1-1996 से न्यूनतम पेंशन 1275/- है जो दि0 1-4-2004 से 1913 कर दी गयी है।

(ख)    अशक्तता पेंशन की दशा में पेंशन उस धनराशि से कम नहीं होगी जो तत्समय मृत्यु की दशा में उनके परिवार को पारिवारिक पेंशन के रूप में अनुमन्य होती।

(ग)    पेंशन प्रपत्र भाग-1 के कालम-9 पर मांग के अनुसार राशिकरण वास्तविक स्वीकृत पेंशन पर अनुमन्य होगा यह सामान्यतया पेंशन के अधिकतम 40 प्रतिशत तक अनुमन्य हो सकता है।

(घ)    राशिकरण की धनराशि सेवानिवृत्ति की अगली जन्मतिथि को आयु के गणनांक में 12 से गुणाकर एक रूपये का राशिकृत मूल्य मानकर की जायेगी। 58 वर्ष की आयु के लिए 125.52 तथा 60 वर्ष के लिए 117.72 रूपये है।

(च)    सेवानिवृत्ति के समय वांछित राशिकृत भाग की कटौती प्राधिकारी पत्र जारी होने के तीन माह या राशिकरण की धनराशि प्राप्त होने की तिथि जो पहले हो से की जायेगी। बाद में आवेदित राशिकरण की दशा में राशिकृत भाग कार्यालयाध्यक्ष द्वारा प्रेषित प्रार्थना पत्र की तिथि से कम किया जायेगा।

(छ)    प्राधिकारी पत्र जारी होने के एक वर्ष तक बिना चिकित्सीय जांच के राशिकरण कराया जा सकेगा। बाद में चिकित्सीय जांच आवश्यक होगी।

(ज)    1-    कार्यालय ज्ञाप संख्या-सा-3-151/दस-2006-308/2004, दिनांक 22 सितम्बर, 2005 द्वारा राज्य सरकार के सिविल/पारिवारिक पेंशनरों के मूल पेंशन के 50 प्रतिशत के बराबर मंहगाई राहत को मूल पेंशन में परिवर्तित करते हुए दिनांक 1 अप्रैल, 2005 से "मंहगाई पेंशन" के रूप में अनुमन्य कराये जाने का निर्णय लिया गया था।

          2-    इस संबंध में शासन को कतिपय प्रश्न संदर्भित हुए है जिनके संबंध में शासनादेश संख्या सा-3-1746/दस-2005-308/2004, दिनांक 2 दिसम्बर, 2005 द्वारा निम्नवत्

उठाये गये प्रश्न स्पष्टीकरण
1- दिनांक 01-04-2005 अथवा उसके पश्चात सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए वित्त (वेतन आयोग) अनुभाग-2 द्वारा जारी शासनादेश दिनांक 22-09-2005 में मंहगाई वेतन को पेंशनरी लाभों के प्रयोजनार्थ मूल वेतन माना गया है। अतएव दिनांक 01-04-2005 अथवा उसके पश्चात सेवानिवृत्त कर्मचारियों के मामलों में पेंशन निर्धारण मूल वेतन तथा मंहगाई वेतन के योग के आधार पर किया जायेगा। परिणामस्वरूप इन मामलों में मंहगाई पेंशन को अलग प्रदर्शित करने की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिये जिसकी कृपया पुष्टि कर दी जाये। कार्यालय-ज्ञाप संख्या सा-3-1517/दस-2005-308/2004 दिनांक 22-09-2005 से परिवर्तित किये जाने के कारण यह परिवर्तन उन्हीं पेंशनरों के मामले में अपेक्षित होगा जिन्हें दिनांक 01-04-2005 के पहले पेंशन देय हो चुकी थी। दूसरे शब्दों में दिनांक 01-04-2005 अथवा उसके बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के मामलों में मंहगाई राहत का कोई अंश मंहगाई पेंशन के रूप में अलग से प्रदर्शित किये जाने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि पेंशन का निर्धारण ही वेतन एवं मंहगाई वेतन दोनो के योग पर आधारित होगा।
2- प्रदेश में वर्तमान समय में न्यूनतम पेंशन रू0 1275 तथा अधिकतम पेंशन रू0 13000 निर्धारित है। 50 प्रतिशत मंहगाई राहत को मंहगाई पेंशन में परिवर्तित किए जाने के कारण क्या पेंशन की न्यूनतम एवं अधिकतम सीमाएं भी अनुपातिक रूप में बढ़ जायेंगी ? चूँकि कार्यालय ज्ञाप संख्या-वे0आ0-2-975/दस-2005-41/04 दिनांक 22-09-2005 के प्रस्तर 4 में यह स्पष्ट किया गया है कि वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर मंहगाई भत्ते को मंहगाई वेतन के रूप में परिवर्तित करते हुए उसे सेवानैवृत्तिक लाभों के प्रयोजनार्थ मूल वेतन मान लिया गया है, अत: कार्यालय ज्ञाप संख्या सा-3-1720/दस-2005-308/97, दिनांक 23-12-1997 प्रस्तर 4 एवं 6 (1) में उल्लिखित पेंशन/पारिवारिक पेंशन की न्यूनतम एवं अधिकतम सीमा दिनांक 01-04-2005 से 50 प्रतिशत बढ़ी हुई समझी जायेगी। दिनांक 23-12-97 के उल्लिखित आदेश तदनुसार इस सीमा तक संशोधित समझे जायेंगे।

(ज2)    राज्य सरकार द्वारा राज्य सरकार के सिविल/पारिपारिक पेंशनरों के मूल पेंशन के 50 प्रतिशत के बराबर मंहगाई राहत को मूल पेंशन में परिवर्तित करते हुए दिनांक 01 अप्रैल, 2005 से "मंहगाई पेंशन" के रूप में अनुमन्य कराये जाने की व्यवस्था कालान्तर में कार्यालय ज्ञाप संख्या-सा-3-151/दस-2006-308/2004, दिनांक 31 जनवरी 2006 के अनुसार दिनांक 01 अप्रैल, 2004 से लागू कर दी गई। इसके फलस्वरूप दिनांक 01 अप्रैल, 2004  से पेंशन एवं मंहगाई पेंशन" के योग पर 11 प्रतिशत की दर से मंहगाई राहत देय होगी। इसी क्रम में दिनांक 01 जुलाई, 2004 तथा दिनांक 01 जनवरी, 2005 से मूल पेंशन एवं मंहगाई पेंशन के योग पर क्रमश: 14 प्रतिशत तथा 17 प्रतिशत की दर से मंहगाई राहत देय होगी।

2-    दिनांक 1 अप्रैल, 2004 से दिनांक 31 जनवरी, 2005 के मध्य सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के पेंशन निर्धारण में कोई हानि न हो, इस हेतु उनके मूल वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर मंहगाई भत्ता को दिनांक 01 अप्रैल, 2004 के पूर्व ही ऐसी तिथि से प्रकल्पित आधार पर संविलीन मानते हुए पेंशन निर्धारण की गणना की जायेगी जिससे उनकी सेवानिवृत्ति के पूर्व के 10 माह की अवधि ऐसे संविलियन से आच्छादित हो जाये।

3-    जिन मामलों में पेंशन राशिकरण पूर्व में स्वीकृत हो चुका है, उनमें इसका पुन:  निर्धारण शासन के वित्त सामान्य अनुभाग-3 के कार्यालय ज्ञाप संख्या सा-3-833/दस-2007-308/2004 टीसी-11 दि0 15 जून 2007 द्वारा किया जायेगा। इसका प्रभाव यह होगा कि सम्बन्धित पदधारक यदि चाहेगा तो पेंशन राशिकरण को संशोधित करा लेगा जिसके फलस्वरूप  पेंशन में होने वाली कमी के कारण अधिक भुगतान की धनराशि का उसे राशिकरण के रूप में मिलने वाले भुगतान में से समायोजित कर लिया जायेगा।

4-    कार्यालय-ज्ञाप दिनांक 22 सितम्बर, 2005 तथा शासनादेश दिनांक 2 दिसम्बर, 2005 एवं अन्य सुसंगत शासनादेश उक्त सीमा तक संशोधित कर दिए गए।

9.    ग्रेच्युटी

                ग्रेच्युटी की गणना अन्तिम आहरित परिलब्धियों पर की जायेगी। दिनांक  01-04-04 से परिलब्धियों की गणना हेतु मूल वेतन एवं 50 प्रतिशत मंहगाई वेतन जोड़कर सेवानिवृत्ति/मृत्यु की तिथि को अनुमन्य  मंहगाई भत्ते को भी ग्रेच्युटी की गणना हेतु सम्मिलित माना जायेगा।

9.1    ग्रेच्युटी तीन प्रकार की होती है -

(1)    सर्विस ग्रेच्युटी -    शासनादेश संख्या : सा-3-1152/दस-935-87, दिनांक 01 जुलाई 1987 के प्रस्तर 4.1 के अनुसार दस वर्ष से कम अर्हकारी सेवा होने पर पेंशन के स्थान पर सर्विस ग्रेच्युटी देय होती है। इसकी दर प्रत्येक पूर्ण अर्हकारी छमाही अवधि के लिए अन्तिम आहरित परिलब्धियों के आधे के बराबर होगी।

(2)    रिटायरमेन्ट ग्रेच्युटी -    रिटायरमेन्ट ग्रेच्युटी 5 वर्ष की अर्हकारी सेवा पूर्ण हो जाने पर अनुमन्य होगी। इसकी धनराशि प्रत्येक पूर्ण छमाही अवधि के लिए अन्तिम आहरित परिलब्धियों के 1/4 के बराबर होगी जिसका अधिकतम अन्तिम परिलब्धियोंके 16 1/2 गुने के बराबर होगा किन्तु रिटायरमेन्ट ग्रेच्युटी की धनराशि रू0 3.50 लाख से अधिक नहीं होगी।

            रिटायरमेन्ट ग्रेच्युटी = 1/4 X अंतिम आहरित परिलब्धियों X पूर्ण अर्हकारी छमाही (अधिकतम 66)

(3)    डेथ ग्रेच्युटी -  सेवारत दशा में मृत्यु हो जाने पर मृतक के परिवार को डेथ ग्रेच्युटी अनुमन्य होगी जिसकी दरें निम्नवत होंगी -

1 1 वर्ष से कम सेवा पर अन्तिम परिलब्धियों का 2 गुना
2 1 वर्ष अथवा उससे अधिक किन्तु 5 वर्ष से कम सेवा पर अन्तिम परिलब्धियों का 6 गुना
3 5 वर्ष से अधिक किन्तु 20 वर्ष से कम अन्तिम परिलब्धियों का 12 गुना
4 20 वर्ष या उससे अधिक सेवा पर अर्हकारी सेवा की प्रत्येक पूर्ण छमाही अवधि के लिए अन्तिम परिलब्धियों के आधे के बराबर जिसकी अधिकतम सीमा अन्तिम परिलब्धियों के 33 गुने के बराबर होगी किन्तु देय धनराशि रू0 3.50 लाख से अधिक नहीं होगी।
डेथ ग्रेच्युटी 20 वर्ष या अधिक सेवा पर
डेथ ग्रेच्युटी = 1/2 x अंतिम परिलब्धियाँ x पूर्ण अर्हकारी छमाही (अधिकतम 66)

9.2    नामांकन :    ग्रेच्युटी के लिए नामांकन परिवार होने की दशा में परिवार के ही सदस्यों को नामित किया जाता है परिवार न होने की दशा में किसी को भी नामित किया जा सकता है। यदि सरकारी सेवक द्वारा ग्रेच्युटी हेतु नामांकन कर दिया गया हो तो मृत्यु ग्रेच्युटी नामांकन के अनुसार ही परिवार के सदस्यों को वितरित की जायेगी किन्तु यदि संबंधित सरकारी सेवक ने नामांकन नहीं किया है तो मृत्यु ग्रेच्युटी का भुगतान निम्नवत किया जायेगा :-

1-    यदि परिवार के निम्नलिखित सदस्यों में से एक या अधिक सदस्य हैं तो उसे संबंधित धनराशि को बराबर-बराबर वितरित कर दिया जायेगा :

        (अ)    पत्नी (पुरूष कर्मचारी के मामले में),   

        (ब)    पति (महिला कर्मचारी के मामले में),

        (स)    पुत्र (सौतेली संतानों तथा गोद ली हुई संतानों को सम्मिलित करते हुए),

        (द)    अविवाहित पुत्रियाँ

2-    यदि उपर्युक्त के अन्तर्गत उल्लिखित परिवार का कोई सदस्य न हो और यदि निम्नलिखित सदस्य हों तो मृत्यु ग्रेच्युटी उनमें बराबर-बराबर बाँट दी जायेगी :

        (अ)    विधवा पुत्रियाँ

        (ब)    18 वर्ष से कम आयु वाले भाई तथा अविवाहित एवं विधवा बहने (सौतेले भाई व बहनों को सम्मिलित करते हुए)।

        (स)    पिता

        (द)    माता

        (य)    विवाहित पुत्रियाँ (सौतेली पुत्रियों को सम्मिलित करते हुए तथा)

        (र)    पूर्व मृतक पुत्र की संतानें

                यदि सरकारी सेवक की सेवा में रहते हुए अथवा सेवानिवृत्ति के उपरान्त बिना ग्रेच्युटी की धनराशि प्राप्त किये मृत्यु हो जाय और उसके परिवार में कोई सदस्य न हो और कोई नामांकन भी न किया हो तो मृत्यु ग्रेच्युटी राज्य सरकार को व्यपगत हो जायेगी।

10.    पारिवारिक पेंशन

(1)    सेवारत मृत्यु हो जाने पर पारिवारिक पेंशन पाने के लिए कोई सेवा अवधि अनिवार्य नहीं है, लेकिन शर्त यह है कि सरकारी सेवक के नियमानुसार चिकित्सा परीक्षा करवाई हो और सरकारी सेवा के लिए योग्य पाया गया हो।
शासनादेश संख्या सा-3-1358/दस-918/79 दिनांक 21-9-79 के अनुसार पारिवारिक पेंशन की अनुमन्यता के लिए शासनादेश संख्या सा-2-769/दस-917/61 दिनांक 24-8-1966 के पैरा-3(क) में लगाया गया एक वर्ष की निरन्तर सेवा अवधि पूरी करने की शर्त इस प्रतिबन्ध के अधीन समाप्त किया गया है कि संबंधित सरकारी सेवक की राजकीय पद पर नियुक्ति से पूर्व नियमानुसार चिकित्सा परीक्षा की गयी थी और वह सरकारी सेवा के लिए योग्य पाया गया था।

(2)    सेवानिवृत्ति के उपरान्त उन्हीं सरकारी सेवकों के मामले में पारिवारिक पेंशन देय है, जिन सरकारी सेवक को पेंशन अनुमन्य रही हो।

10.1    साधारण दर पर पारिवारिक पेंशन की गणना :

पारिवारिक पेंशन अन्तिम आहरित वेतन के 30 प्रतिशत की दर पर सामान्य रूप से दी जायेगी। पारिवारिक पेंशन की न्यूनतम धनराशि 1913/- प्रतिमाह होगी तथा अधिकतम धनराशि राज्य सरकार के अधिकतम वेतन की 30 प्रतिशत तक सीमित होगी।
मासिक मूल से अभिप्राय उस मासिक मूल वेतन से है जो सरकारी सेवक सेवानिवृत्ति के ठीक पहले अथवा यदि सरकारी सेवक की मृत्यु सेवाकाल में हो गयी तो मृत्यु के दिनांक को पा रहा हो। यदि सेवानिवृत्ति के ठीक पहले या सेवारत से होगा जो वह छुट्टी पर जाने या निलम्बित होने से ठीक पहले प्राप्त किया हो।

10.2    दुगनी दर पर पारिवारिक पेंशन

(1)    सेवारत मृत्यु हो जाने की दशा में यदि मृतक सरकारी सेवक ने 07 वर्ष की अविरल सेवा प्रदान की है तो मृत्यु की तिथि के बाद की तिथि से प्रारम्भिक 7 वर्ष तक या उस तिथि तक जब वह जीवित रहने की दशा में 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेता जो भी पहले समाप्त हो, पारिवारिक पेंशन मूल वेतन की आधी अथवा साधारण दर पर आगणित (30 प्रतिशत x अन्तिम आहरित मूल वेतन) पारिवारिक पेंशन का दुगना, जो भी कम हो, के बराबर होगी। उसके उपरान्त पारिवारिक पेंशन साधारण दर पर देय होगी।

(2)    सेवानिवृत्ति के उपरान्त मृत्यु हो जाने की दशा में पारिवारिक पेंशन-दुगनी दर उस तिथि तक, मृतक पेंशनर जीवित रहने की दशा में 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेना अथवा सात वर्ष तक जो पहले हो इस प्रतिबन्ध के अधीन देय होगी कि पारिवारिक पेंशन की धनराशि किसी भी दशा में सेवानिवृत्ति के उपरान्त सरकारी सेवक के स्वीकृत पेंशन से अधिक नहीं होगी।

पारिवारिक पेंशन निम्नलिखित क्रम में केवल परिवार के एक सदस्य को देय होगी-

(क)    पति/पत्नी की मृत्यु अथवा पुनर्विवाह तक जो भी पहले हो।

(ख)    संतानों की आयु की वरीयता के क्रम में पुत्र/पुत्री को 25 वर्ष  की आयु अथवा समस्त स्त्रोतों से मासिक रू0 2550/- प्राप्त करने अथवा विवाह/मृत्यु की तिथि जो भी पहले हो तक।

(ग)    यदि माता/पिता पूर्ण रूप से आश्रित हैं तो उनको परिवार में सम्मिलित माना जायेगा। पति/पत्नी के बाद संतान को आयु की वरीयता क्रम में देय होगी। किन्तु विकलांग संतान यदि वरीयता में पहले आती है तो पहले सभी संतानों का क्रम समाप्त होने पर विकलांग पेंशन पुन:  जीवित हो जायेगी। शासनादेश संख्या सा-3-948/दस-30/97 दिनांक 28 जुलाई 1998 के अनुसार अगर पुत्र/पुत्रियाँ (विधवा, तलाकशुदा पुत्रियों सहित) व माता पिता की मासिक आय सब स्त्रोतों के मिलाकर रू0 2550/- (रूपये दो हजार पांच सौ मात्र) या उससे अधिक है तो वह जीविकोपार्जन में सक्षम माने जायेंगे।

11.    पेंशन का राशिकरण

                कोई भी सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी पेंशन का अधिकतम 40 प्रतिशत तक राशिकृत कराकर एक मुश्त भुगतान प्राप्त कर सकता है। यदि कोई सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी सेवानिवृत्ति की तिथि अथवा पेंशन प्राधिकार पत्र निर्गत होने के दिनांक से जो भी बाद में हो से एक वर्ष के भीतर पेंशन के राशिकरण हेतु आवेदन करता है तो उसे स्वास्थ परीक्षण आवश्यक नहीं होगा। इसके अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी/चिकित्सा परिषद की संस्तुति के आधार पर राशिकरण स्वीकृत किया जायेगा।

                राशिकरण की गणना शासन द्वारा अनुमोदित रेट तालिका के आधार पर पेंशनर की आयु के आधार पर की जाती है। आयु की गणना विभागाध्यक्ष/कार्यालयाध्यक्ष कार्यालय में प्रार्थना पत्र प्राप्त होने की तिथि के बाद पड़ने वाली जन्मतिथि के आधार पर की जाती है। सेवानिवृत्ति के पहले प्रार्थना पत्र देने पर सेवानिवृत्ति के बाद पड़ने वाली जन्मतिथि के आधार पर किया जाता है। राशिकृत धनराशि की निम्नतम गणना की जाती है :

राशिकृत मूल्य =
राशिकृत पेंशन का भाग x 12 x अगले जन्मतिथि पर पड़ने वाले आयु के सम्मुख अंकित राशिकृत मूल्य

अगले जन्म दिवस पर आयु राशिकृत मूल्य अगले जन्म दिवस पर आयु राशिकृत मूल्य
30

31

40

45

49

50

58

17.78

17.62

15.92

14.62

13.54

13.25

10.78

59

60

61

62

70

80

84

10.46

10.13

09.81

09.47

06.91

04.17

03.32

                राशिकरण हेतु अभ्यर्पित पेंशन के समतुल्य राशि की कटौती राशिकृत भाग के बराबर पेंशनर को राशिकरण की धनराशि के भुगतान की तिथि अथवा भुगतान के आदेश के तीन माह बाद, जो भी पहले हो, से की जाएगी। राशिकरण भुगतान की कटौती के ठीक 15 वर्ष बाद राशिकृत भाग को पेंशन में पुर्नस्थापित माना जायेगा। पेंशनर को मंहगाई भत्ता सम्पूर्ण पेंशन (अर्थात राशिकृत कराने से पूर्व की पेंशन) पर मिलेगा।

12.    महत्वपूर्ण तथ्य

(1)    पुत्र/पुत्री की विकलांगता/मानसिक विक्षिप्तता यदि कर्मचारी की सेवाकाल के उपरान्त भी परिलक्षित हुई है तो उसे पारिवारिक पेंशन अनुमन्य होगी, बशर्तें उसे किसी अन्य नियम के अधीन पारिवारिक पेंशन नहीं मिल रही है।

(2)    शारीरिक रूप से विकलांग वयस्क संतान, यदि वह स्वयं पेंशन प्राप्त करने में सक्षम है तो पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने हेतु संरक्षक नियुक्त किये जाने की आवश्यकता नहीं है। सी0एस0आर0 के अनुच्छेद 470 के अनुसार अधिवर्षता पेंशन की अनुमन्यता हेतु संपूर्ण सेवा का संतोषजनक होना आवश्यक था। ऐसा न होने की स्थिति में पेंशन कम की जा सकती थी। अब अधिसूचना संख्या सा-3-424/दस-933/89 दिनांक 11-2-1996 के अनुसार (उ0प्र0 सिविल सर्विस बारहवाँ संशोधन विनियमावली 1996) सी0एस0आर0 का अनुच्छेद 470 समाप्त कर दिया गया है।

13.    विलम्ब के कारण ब्याज की अदायगी

            शासनादेश संख्या सा-3-2102/दस-971/90 दिनांक 6-12-1994 द्वारा सेवानिवृत्त सरकारी सेवक जो सेवानिवृत्ति की तिथि से तीन माह की अवधि के उपरान्त मृत्यु एवं सेवानिवृत्त उपादान की धनराशि का भुगतान किये जाने पर उसी दर पर ब्याज अनुमन्य कराये जाने की व्यवस्था की गयी है जैसा कि सामान्य भविष्य निर्वाह निधि की संहत जमा धनराशि पर समय-समय पर अनुमन्य होता है। इसी शासनादेश में यह भी व्यवस्था है कि ऐसे सभी मामलों में जिनमें प्रशासकीय विलम्ब के कारण ब्याज की अदायगी हो जाती हो, उसमें विलम्ब के लिए जिम्मेदारी नियत करते हुए आवश्यक कार्यवाही की जानी चाहिए। शासनादेश संख्या सा-3-1519/दस-1997 दिनांक 15-7-1997 के अनुसार ग्रेच्युटी पर ब्याज के भुगतान के स्वीकर्ता अधिकारी विभागाध्यक्ष है। ब्याज के भुगतान की व्यवस्था शासन द्वारा अनुदान संख्या 62 के अधीन लेखाशीर्षक-2049 के अन्तर्गत कराई जाती है। शासनादेश संख्या सा-3-712/दा-2001-305(4)/2000 दिनांक 17-5-2001 द्वारा न्यायिक/विभागीय कार्यवाहियों की समाप्ति पर ग्रेच्युटी के विलम्ब से भुगतान पर ब्याज के भुगतान की व्यवस्था के संबंध में स्थिति स्पष्ट की गयी है। उक्त शासनादेश  दिनांक 17-5-2001 के अनुसार राशिकरण की धनराशि के विलम्ब से भुगतान पर कोई ब्याज देय नहीं है, क्योंकि पेंशन के एक भाग की राशिकृत मूल्य की स्वीकृति हो जाने पर भी उसके भुगतान की तिथि तक पूर्ण पेंशन का भुगतान होता रहता है तथा भुगतान की तिथि के बाद ही पेंशन कम होती है।

                शासनादेश संख्या 3975/पांच-6-97-294/96 दिनांक 1-1-1998 व शासनादेश संख्या 1134/पांच-6-2001-294/96 दिनांक 27-6-2001 के अनुसार सेवारत एवं सेवानिवृत्त सरकारी सेवकों तथा उनके परिवार के आश्रित सदस्यों को प्रदेश के भीतर तथा प्रदेश के बाहर कराई गयी चिकित्सा पर हुए व्यय की प्रतिपूर्ति किये जाने की व्यवस्था है। उक्त शासनादेश दिनांक 27-6-2001 एवं शासनादेश संख्या 1018/5-6-2002-294/96 दिनांक 23-7-2002 में प्रदेश के भीतर तथा प्रदेश के बाहर कराई गयी चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति के दावों के परीक्षण/प्रतिहस्ताक्षर तथा स्वीकृति की प्रक्रिया दी गयी है।

14.    पेंशन स्वीकृतकर्ता प्राधिकारी

            l शासनादेश संख्या सा-2-697/दस-26-98 दिनांक 8-10-1999 में यह व्यवस्था दी गई है कि दिनांक 1-4-2000 को अथवा उसके उपरान्त सेवानिवृत्त हुए समूह क के समस्त अधिकारियों, अखिल भारतीय सेवा क सभी अधिकारी तथा लोक सेवा आयोग, लोक सेवा अधिकरण तथा अन्य विशिष्ट पदाधिकारियों के सेवानैवृत्तिक लाभ के  निस्तारण का कार्य निदेशक पेंशन निदेशालय उत्तर प्रदेश लखनऊ के अधिष्ठान द्वारा समूह ख एवं ग के सरकारी कार्मिकों के सेवानैवृत्तिक लाभों का निस्तारण मण्डलीय अपर/संयुक्त निदेशक कोषागार एवं पेंशन के द्वारा किया जायेगा।

15.    उ0प्र0 पेंशन के मामलों की (प्रस्तुतीकरण, निस्तारण और विलम्ब का परिवर्जन) नियमावली, 1995 (अधिसूचना संख्या: वित्त सामान्य अनुभाग-3, संख्या सा0 3-1644/दस-904-94, दिनांक: 2 नवम्बर, 1995) समय अनुसूची और सहबद्ध विषयों के कार्यान्वयन की प्रक्रिया

(1)    किसी विलम्ब को नोडल अधिकारी/मुख्य नोडल अधिकारी :-
(क)    पेंशन प्राप्तकर्ता/पेंशन प्राप्तकर्ताओं के संगठनों की शिकायत पर
(ख)    पेंशन के मामलों के निस्तारण के अनुवर्तन पर, अभिनिश्चित कर सकते हैं।

(2)    जब कभी नोडल अधिकारी की जानकारी में कोई विलम्ब का मामला आता है तो वह विभागाध्यक्ष/ कार्यालयाध्यक्ष से विलम्ब के कारणों के संबंध में सभी सुसंगत सूचनायें प्रस्तुत करने की अपेक्षा करेगा और ऐसी जांचोपरान्त जिसे वे उचित समझे विलम्ब के लिए उत्तरदायी व्यक्ति का पता लगायेगा और उसके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिये एक प्रस्ताव सम्बद्ध अनुशासनिक प्राधिकारी को भेजेगा। नोडल अधिकारी/मुख्य नोडल अधिकारी अनुशासनात्मक कार्यवाही के पूर्ण होने तक मामले का अनुसरण करेगा और ऐसी कार्यवाही का अभिलेख रखेगा। नोडल अधिकारी ऐसी अनुशासनात्मक कार्यवाही के परिणाम के संबंध में मुख्य नोडल अधिकारी को सूचित करेगा।

(3)    कोई व्यक्ति जो किसी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के संबंध में उससे संबंधित किसी अन्य मामले के संबंध में अपेक्षित सूचना नोडल अधिकारी/मुख्य नोडल अधिकारी को देने में असफल रहता है, या जो विलम्ब के लिए उत्तरदायी है, वह कदाचार का दोषी होगा और उस पर  लागू दण्डात्मक नियमों के अधीन दण्डनीय होगा।

(4)    सम्यक रूप से पूर्ण पेंशन के कागजात को सभी सुसंगत दस्तावेजों के साथ उसके संबंध में अनुसूची में विनिर्दिष्ट समय-अनुसूची के भीतर, पेंशन स्वीकर्ता प्राधिकारी को भेजा जायेगा।

(5)    मुख्य नोडल अधिकारी/नोडल अधिकारी और पेंशन स्वीकृत प्राधिकारी पेंशन के मामलों का समय-अनुसूची के भीतर निस्तारण सुनिश्चित करेगा।

(6)    पेंशन स्वीकर्ता प्राधिकारी ऐसे अधिकारियों/पदाधिकारियों की नियमित मासिक बैठक आयोजित करेगा या आयोजित होने देगा, जो ऐसे मामलों में व्यवहार करते हों ओर ऐसे मामलों में व्यवहार करते हों और ऐसे मामलों के परीक्षण और निस्तारण के लिए सभी समुचित कदम उठायेगा।

(7)    सरकार में संबंधित विभाग के यथास्थिति, प्रमुख सचिव या सचिव सभी पेंशन के मामलों के संबंध में विभागाध्यक्ष/कार्यालयाध्यक्ष के कार्य का पर्यवेक्षण करेंगे और समय-अनुसूची के भीतर ऐसे मामलों का परीक्षण और निस्तारण सुनिश्चित करायेंगे।

क्र0 सं0 कार्य का विवरण समय जिसके भीतर कार्य किया जाना है कार्य के लिए उत्तरदायी व्यक्ति
1 सेवापुस्तिका का पूरा किया जाना और सत्यापन प्रत्येक वर्ष का जून मास 1- विभाग से संबंधित अधिष्ठान का संबंधित लिपिक
2- कार्यालय का अधीक्षक
3- कार्यालयाध्यक्ष
2 सेवापुस्तिका का पुनरावलोकन और कमी यदि कोई हो का पूरा किया जाना सेवानिवृत्ति के 8 मास पूर्व 1- संबंधित अधिष्ठान लिपिक
2- कार्यालय अधीक्षक
3- कार्यालयाध्यक्ष
3 अदेयता प्रमाण पत्र का (सेवा अवधि में) जारी किया जाना सेवानिवृत्ति के दो मास पूर्व कार्यालयाध्यक्ष
4 (क) सेवानिवृत्ति होने वाले कर्मचारी को पेंशन प्रपत्र प्रदान किया जाना
(ख) पेंशन प्रपत्र का भरा जाना
सेवानिवृत्ति के 8 मास पूर्व

 

सेवानिवृत्ति के 6 मास पूर्व

कार्यालयाध्यक्ष

 

सेवानिवृत्ति होने वाले सरकारी सेवक

5 मृत्यु के मामलों में प्रपत्र का भरा जाना मृत्यु के एक मास पश्चात 1- पेंशन लिपिक
2- कार्यालय अधीक्षक
3- कार्यालयाध्यक्ष
6 नियुक्ति प्राधिकारी से जाँच किया जाना कि क्या कोई विभागीय कार्यवाही विचाराधीन है या नहीं सेवानिवृत्ति के 8 मास पूर्व 1- कार्यालय अधीक्षक
2- कार्यालयाध्यक्ष
7 नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा उपर्युक्त सूचना की पूर्ति सेवानिवृत्ति के 7 मास पूर्व नियुक्ति प्राधिकारी
8 पेंशन प्रपत्रों का अग्रवारण
(क) सेवा पेंशन
(ख) पारिवारिक पेंशन
सेवानिवृत्ति के 5 मास पूर्व मृत्यु के एक मास पश्चात कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष
कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष
9 पेंशन प्रपत्रो आदि का परीक्षण और संवीक्षा और यदि उसमें कोई आपत्ति या कमी पाई जाये तो उसे दूर करने के लिए विभाग को लिखा जाना पेंशन प्रपत्रों को प्राप्ति के दो मास 1- लेखाकार
2- सहायक लेखाधिकारी
3- पेंशन भुगतान आदेश जारी करने वाला अधिकारी
10 आपत्तियों का निराकरण आपत्ति प्राप्त करने के पश्चात एक मास कार्यालयाध्यक्ष
11 पेंशन मामले का पुन: परीक्षण/ निस्तारण शुद्ध किये गये प्रपत्रों के प्राप्त होने के पश्चात एक मास 1- लेखाकार
2- सहायक लेखाधिकारी
3- पेंशन भुगतान आदेश जारी करने वाला अधिकारी
12 रोके गये उपादान के निर्मुक्त किये जाने के लिए प्रपत्र-2 अदेयता प्रमाण पत्र का अग्रसारण सेवानिवृत्ति के दो मास पश्चात कार्यालयाध्यक्ष
13 (पेंशन/उपादान/पेंशन के राशिकरण) के भुगतान आदेश का जारी किया जाना सेवानिवृत्ति की संध्या तक या पर 1- लेखाधिकारी
2- सहायक लेखाधिकारी
3- पेंशन भुगतान आदेश जारी करने वाला अधिकारी
14 अनन्तिम पेंशन की स्वीकृति (यदि अन्तिम रूप दिया जाना संभव न हो) सेवानिवृत्ति/मृत्यु के एक मास पश्चात 1- पेंशन लिपिक
2- कार्यालय अधीक्षक
3- कार्यालयाध्यक्ष
15 अनन्तिम पेंशन का भुगतान प्रत्येक मास के 7वें दिन तक आहरण एवं वितरण अधिकारी
16 पेंशन का भुगतान भुगतान आदेश प्राप्त होने के दिनांक से एक माह कोषाधिकारी/आहरण एवं वितरण अधिकारी
17 सेवानिवृत्त कर्मचारी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही सिविल सर्विस रेगुलेशन्स के अनुच्छेद 351-क में दी गयी प्रक्रिया के अनुसार और सरकारी आदेश के प्रापत होने के तीन मास के भीतर निर्णय कर लिया जाना यदि विभागीय कार्यवाही सेवानिवृत्ति के पूर्व संस्थित की गयी हो तो इसे सेवानिवृत्ति के दिनांक से छ: मास के भीतर पूरा कर‍ दिया जाना चाहिए। सरकार का प्रशासनिक विभाग/ नियुक्ति प्राधिकारी
18 पेंशन से संबंधित मामलों के संबंध में दायर विधिक वादों का प्रतिवाद न्यायालय के आदेश के अनुसार या रिट याचिका की प्राप्ति के दिनांक से दो मास के भीतर, जो पहले हो, प्रतिशपथ पत्र प्रस्तुत होना चाहिए। संबंधित विभाग का प्रतिवादी

16.    अनुकम्पा निधि से आर्थिक सहायता

                उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने सेवकों के असामयिक मृत्यु के कारण निर्धन अवस्था में पड़े उनके परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु "उत्तर प्रदेश अनुकम्पा निधि" स्थापित किया है। इस हेतु उत्तर प्रदेश अनुकम्पा निधि नियमावली बनायी गयी है। ऐसे सरकारी सेवक, जिन्होंने न्यूनतम एक वर्ष सरकारी सेवक कर लिया हो, की सेवाकाल में मृत्यु हो जाने पर उसके परिवार द्वारा 5 वर्ष के अन्दर अनुकम्पा निधि से आर्थिक सहायता प्राप्त करने हेतु विहित प्रारूप में संबंधित कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष को आवेदन किया जा सकता है। ऐसा आवेदन प्राप्त होने पर कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष द्वारा आवेदन के भाग-दो में अपेक्षित सूचना अभिलिखित करके उस आवेदन को शासन से संबंधित प्रशासनिक विभाग को प्रेषित किया जाएगा। प्रशासनिक विभाग द्वारा आर्थिक सहायता संबंधी उपर्युक्त प्रस्ताव का परीक्षण, उपर्युक्त नियमावली के उपबन्धों के अनुसार, किया जाएगा तथा आवेदन के भाग-तीन में संस्तुति अभिलिखित करके पत्रावली वित्त विभाग को प्रेषित की जाएगी। यदि वित्त विभाग प्रस्ताव से सहमत हो तो प्रशासनिक विभाग सम्पूर्ण तथ्यों सहित संक्षिप्त टिप्पणी की सात प्रतियाँ वित्त विभाग को प्रेषित करेगा। तदुपरान्त वित्त विभाग उसे "उत्तर प्रदेश अनुकम्पा निधि समिति" के समक्ष प्रस्तुत करेगा। इस समिति में निम्नलिखित पदाधिकारी होते हैं :-

  (1)    प्रमुख सचिव, वित्त अथवा सचिव, वित्त   अध्यक्ष
  (2)    सचिव, गृह अथवा उनके द्वारा नामित विशेष सचिव   सदस्य
  (3)    सचिव, आवास अथवा उनके द्वारा नामित विशेष सचिव   सदस्य
  (4)    सचिव, नगर विकास अथवा उनके द्वारा नामित विशेष सचिव   सदस्य
 

(5)    सचिव, राजस्व अथवा उनके द्वारा नामित विशेष सचिव

  सदस्य
  (6)    उप सचिव, वित्त या उससे उच्च अधिकारी   पदेन सचिव

            उपर्युक्त समिति प्रस्तुत किये गये प्रकरण पर विचार करके अपनी संस्तुति सरकार को प्रेषित करेगी। तदुपरान्त वित्त विभाग उस संस्तुति पर विचार करेगा एवं वित्त मंत्री के अनुमोदन से निर्णय लेकर आदेश जारी करेगा। किसी एक व्यक्ति के मामले में अनुकम्पा निधि से न्यूनतम देय धनराशि रू0 25.000 तथा अधिकतम देय धनराशि रू0 1,00,000 होगी। मृत सेवक के परिवार के सदस्यों की संख्या तथा मामले की आवश्यकता के अनुसार देय धनराशि का विनिश्चय किया जाएगा। साधारणतया मृत सेवक का एक आश्रित होने पर उसके अन्तिम मूल वेतन के 5 गुना के बराबर, तथा अधिकतम 5 आश्रित होने पर उसके 25 मास के मूल वेतन के बराबर, धनराशि, उपर्युक्त न्यूनतम एवं अधिकतम सीमा के अधीन, स्वीकृत की जाएगी। प्रत्येक मामले में स्वीकृत धनराशि, प्रत्येक लाभार्थी के नाम अलग-अलग बैंक ड्राफ्ट प्राप्त कराकर उसकी पावती रसीद वित्त विभाग को प्रेषित करेंगे तथा इसकी सूचना विभागाध्यक्ष एवं प्रशासनिक विभाग को देंगे।

            अनुकम्पा निधि से आर्थिक सहायता प्राप्त करने हेतु मृत सेवक के "परिवार" का तात्पर्य उसके परिवार के उस पूर्णत: आश्रित निम्नलिखित सदस्यों से है:-

            (1)    पत्नी या पति, यथास्थिति,
            (2)    धर्मज संतान,
            (3)    सौतेली संतान,   
            (4)    पिता और माता
            (5)    अविवाहित पुत्री तथा बेरोजगार पुत्र, जिनकी उम्र 25 वर्ष से कम हो।

            अनुकम्पा निधि से आर्थिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया एवं आवेदन का प्रारूप उत्तर प्रदेश अनुकम्पा निधि नियमावली में विहित है।

17.    भवन निर्माण आदि अग्रिम पर ब्याज से अभिमुक्त

                शासनादेश संख्या-बी-3-4086/दस-94-20(24)/92 दिनांक 31 अक्टूबर, 1994

                सरकारी सेवकों को उनके सेवाकाल में भूमि या भवन का क्रय करने, भवन का निर्माण, मरम्मत या विस्तार करने, वाहन तथा कम्प्यूटर क्रय करने हेतु अग्रिम स्वीकार किया जाता है जिसकी ब्याज सहित वसूली संबंधित सेवक की सेवानिवृत्ति के पूर्व सुनिश्चित की जाती है।

                ऐसे प्रकरणों, जिनमें भवन निर्माण/क्रय/मरम्मत/विस्तार अग्रिमों पर देय ब्याज  की वसूली हो गई हो, को उपर्युक्त निर्णय, के अन्तर्गत पुनर्विचार हेतु रि-ओपेन नहीं किया जायेगा लेकिन जिन प्रकरणों में ब्याज की देय धनराशि अभी वसूल नहीं हुई है, उनका निस्तारण इस निर्णय के अन्तर्गत किया जायेगा परन्तु जिन प्रकरणों में ब्याज की आंशिक रूप से वसूली कर ली गई हो उनमें केवल वसूली हेतु अवशेष ब्याज की धनराशि ही माफ की जायेगी।

                शासन द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि भवन निर्माण/क्रय/मरम्मत/विस्तार अग्रिम के ऐसे प्रकरण, जो उक्त निर्णय से आच्छादित होते हों, में मूलधन की अवशेष धनराशि की पूर्ण वसूली सुनिश्चित करके देय ब्याज की धनराशि की गणना की पुष्टि महालेखाकार से कराने के उपरान्त ब्याज माफी का अधिकार अग्रिम स्वीकृत करने हेतु सक्षम अधिकारी को प्रतिनिहित कर दिया जाये। अत: यह निर्णय लिया गया कि उपरोक्त के सम्बन्ध में ब्याज माफी के आदेश अग्रिम स्वीकृत करने हेतु सक्षम अधिकारी द्वारा पारित किये जायेंगे। पारित आदेशों की एक प्रति महालेखाकार तथा शासन को उपलब्ध करायी जायेगी। आदेश में अन्य सामान्य बातों के अलावा अग्रिम के पूर्ण विवरण यथा-स्वीकृति आदेश संख्या-स्वीकृत धनराशि, किश्तों के अवमुक्त करने की तिथि का भी स्पष्ट उल्लेख किया जायेगा।

                प्रत्येक वर्ष के अन्त में शासन को इस आशय की सूचना उपलब्ध कराई जायेगी कि आलोच्य वर्ष में भवन निर्माण/क्रय/मरम्मत/विस्तार अग्रिम की ब्याज के मद में देय कुल कितनी धनराशि सक्षम अधिकारी द्वारा पारित आदेशों के अन्तर्गत माफ की गई। यह सूचना प्रत्येक वर्ष अप्रैल माह की 15 तारीख तक शासन के वित्त विभाग को अवश्य उपलब्ध करा दी जाये।

                कर्मचारियों की सेवाकाल में मृत्यु की दशा में मोटर वाहन/व्यक्तिगत कम्प्यूटर अग्रिमों पर भी देय ब्याज की गणना मृत्यु की तिथि तक ही की जायेगी परन्तु मृत्यु की तिथि तक देय ब्याज की वसूली नियमानुसार की जायेगी।

18.    लापता सरकारी सेवकों के परिवार को अनुमन्य सुविधाएँ

                जब कोई सरकारी सेवक लापता हो जाए एवं सम्यक् प्रयास के बावजूद कोई पता न चले तब उसके कुटुम्ब को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने सेवकों के कुटुम्ब को ऐसी कठिनाइयों से उबारने हेतु शासनादेश संख्या-सा0-3-जी0आई0 88/दस-909-87, दिनांक 20 मार्च, 1987 द्वारा, लापता सेवक के कुटुम्ब को निम्नलिखित देयों का भुगतान करने का कार्यकारी आदेश निर्गत किया है :-

(1)    सरकारी सेवक को देय अवशेष वेतन, देय अवकाश नकदीकरण एवं भविष्य निधि में उपलब्ध धनराशि,
(2)    पारिवारिक पेंशन, एवं
(3)    उपादान।

                शासनादेश के प्रस्तर-2 में अभिलिखित शर्तें/औपचारिकताएँ पूर्ण होने पर क्रम सं0 (1) पर उल्लिखित धनराशि का भुगतान, तुरन्त कर दिया जाएगा तथा क्रम सं0 (2) एवं (3) पर उल्लिखित देयों का भुगतान, एक साल की अवधि व्यतीत होने के उपरान्त ही किया जाएगा। ये भुगतान उस सेवक द्वारा किये गये नामांकन के आधार पर किया जाना चाहिए।

2-    उपरोक्त सुविधायें केवल निम्न औपचारिकताओं के पूर्ण करने पर ही अनुमन्य की जा सकती है :-

(1) सम्बन्धित सरकारी सेवक के परिवार ने संबंधित पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी हो और पुलिस द्वारा इस आशय का प्रमाण-पत्र दे दिया गया हो कि पुलिस द्वारा सभी प्रसास किये जाने के बाद भी संबंधित कर्मचारी को नहीं ढूंढा जा सका।

(2)    संबंधित कर्मचारी के नामितों/आश्रितों द्वारा इस आशय का क्षतिपूर्ति बंधपत्र (इन्डेमिनिटि बांड) दे दिया गया हो कि यदि गुमशुदा कर्मचारी उपस्थित हो जायेगा और दावा करेगा तो कर्मचारी को देय भुगतानों में से उसके परिवार को दिये गये भुगतानों का समायोजन कर दिया जायेगा।

(3)    संबंधित विभागाध्यक्ष/कार्यालयाध्यक्ष सम्बन्धित सरकारी सेवक के विरूद्ध निकल रहे शासकीय देयों का आगणन कर लेंगे और परिवार के देय अवशेष अथवा सेवा निवृत्ति के लाभों में से नियमानुसार उसकी वसूली करेंगे।

(4)     पारिवारिक पेंशन एवं सेवा एवं मृत्यु आनुतोषिक की स्वीकृति के संबंध में वही प्रक्रिया अपनायी जायेगी जैसी उक्त प्रकार के सामान्य मामलों में अपनाई जाती है। अन्य अवशेषों के भुगतान के संबंध में सामान्य प्रक्रिया ही अपनायी जायेगी।

19.    अर्जित अवकाश का नकदीकरण

                शासनादेश संख्या :  सा-4-393/दस-99-200/88, दिनांक 01 जुलाई 1999, के अनुसार सेवानिवृत्ति पर अवकाश लेखे में जमा अर्जित अवकाश के बदले में नकद धनराशि के भुगतान की सुविधा 300 दिनों की अधिकतम सीमा के अधीन अनुमन्य है।

                शासनादेश संख्या सा-4-438/दस-2000-203-86, दिनांक 03 जुलाई, 2000 के अनुसार सरकारी सेवकों को सेवानिवृत्ति पर उनके अवकाश लेखे में जमा 300 दिन तक के अर्जित अवकाश का नकदीकरण स्वीकारने का अधिकार विभागाध्यक्ष को प्रदान किए गए है।

                शासनादेश संख्या सा-3-452/दस-2003-503-2003, दिनांक 26 मार्च, 2003 सपठित शासनादेश संख्या सा-3-759/दस-2003-503-2003, दिनांक 19 जून, 2003 के अनुसार सेवानिवृत्ति के समय प्रदान किया जाने वाला अवकाश नकदीकरण को 'पेंशन तथा सेवानिवृत्ति हित लाभ' के अन्तर्गत रखा गया है। भुगतान विभागीय आय-व्ययक से किए जाने के स्थान पर अनुदान संख्या-62 से किया जायेगा।

2071 पेंशन तथा अन्य सेवानिवृत्ति हित लाभ (आयोजनेत्तर)
01- सिविल
115- छुट्टी नकदीकरण हित लाभ
03- सेवानिवृत्ति के समय अवकाश नकदीकरण
01- दिनांक 08 नवम्बर, 2000 तक सेवानिवृत्ति कर्मचारियों के अवकाश का नकदीकरण 33-पेंशन/ आनुतोषिक/अन्य सेवानिवृत्ति कर्मचारियों के अवकाश नकदीकरण।
02- दिनांक 08 नवम्बर, 2000 के पश्चात सेवानिवृत्ति कर्मचारियों के अवकाश का नकदीकरण
33- पेंशन/आनुतोषिक/अन्य सेवानिवृत्ति हित लाभ

20-    स्थायी निवास स्थान तक यात्रा भत्ता

                वित्तीय नियम संग्रह खण्ड-3 के नियम-81-ए के अनुसार सेवारत सरकारी सेवक की मृत्यु होने पर, उसके परिवार के सदस्यों को उनके अन्तिम मुख्यालय के स्थान से सामान्य निवास (स्थायी) स्थान तक रेल/सड़क मार्ग से यात्रा एवं निजी सामान के परिवहन पर किया गया व्यय इस प्रतिबन्ध के साथ अनुमन्य है कि यात्रा निकटस्थ मार्ग से मृत्यु के 6 माह के भीतर कर ली जाय।

                परिवार की परिभाषा और अद्यतन यात्रा आदि की दरों विषयक शासनादेश संख्या-सा-4-395/दस-99-600/99, दिनांक 11 जून, 99 इस संकलन के भाग-1 के अध्याय-7 में सम्मिलित है शासनादेश संख्या : ए-1-1438/दस-10(60)-62, दिनांक 06 फरवरी, 1980 के अनुसार राज्य कर्मचारियों को सेवाकाल में मृत्यु होने पर उनके परिवारों को यात्रा व्यय के लिए अग्रिम भुगतान की सुविधा अनुमन्य है।

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